NGT और कलेक्टर के आदेश बेअसर, मानसून में भी जारी अवैध रेत कारोबार; नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा
मानसून के दौरान नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन का कारोबार बेधड़क जारी है। प्रशासनिक आदेशों के बाद भी रेत माफिया सक्रिय नजर आ रहे हैं, जिससे नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
प्रतिबंध के बावजूद जारी है रेत का अवैध कारोबार
मानसून अवधि में नदियों में जलस्तर बढ़ने और जलीय जीवों के प्रजनन काल को देखते हुए रेत खनन पर रोक लगाई जाती है। इसके पीछे उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना होता है। लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में अवैध रूप से रेत निकालने और उसे परिवहन करने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय रेत से भरे वाहनों की आवाजाही जारी रहती है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी नियमों की भी अनदेखी हो रही है।
NGT के निर्देशों की हो रही अनदेखी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नदियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मानसून के दौरान रेत खनन पर रोक भी इन्हीं पर्यावरणीय उपायों का हिस्सा है। इसके बावजूद अवैध गतिविधियों के जारी रहने से प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
कलेक्टर के आदेश के बाद भी नहीं थमा कारोबार
जिला कलेक्टर बालागुरु ने भी मानसून के दौरान अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में रेत का कारोबार जारी रहने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अवैध गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती हैं।
नदियों के अस्तित्व पर बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों से अनियंत्रित तरीके से रेत निकालने से नदी की गहराई, जल प्रवाह और आसपास के पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी भविष्य में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध रेत खनन पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल आदेश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लगातार निगरानी और कार्रवाई जरूरी है।
प्रशासन की सख्ती पर टिकी नजर
अब देखना होगा कि NGT और जिला प्रशासन के निर्देशों के बाद अवैध रेत कारोबार पर कितना प्रभावी नियंत्रण लगाया जा पाता है। मानसून के दौरान नदियों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशासन की कार्रवाई अहम मानी जा रही है।

