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MP Highways: युवाओं के लिए डेथ ट्रैप बने हाईवे, Gen-Z की सबसे ज्यादा जा रही जान; सिस्टम पर भी सवाल

MP Highways: युवाओं के लिए डेथ ट्रैप बने हाईवे, Gen-Z की सबसे ज्यादा जा रही जान; सिस्टम पर भी सवाल

मध्य प्रदेश के हाईवे लगातार बढ़ते सड़क हादसों के कारण चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। खासतौर पर 14 से 29 साल की उम्र के युवा सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा जान गंवा रहे हैं। तेज रफ्तार, खतरनाक ओवरटेकिंग, बाइक पर स्टंट और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने का जुनून कई युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हाल के महीनों में प्रदेश के अलग-अलग हाईवे पर हुए हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

हाईवे पर सबसे ज्यादा खतरे में युवा

मध्य प्रदेश में सड़क हादसों की तस्वीर बताती है कि युवा वर्ग हाईवे दुर्घटनाओं का बड़ा शिकार बन रहा है। तेज रफ्तार में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की प्रमुख वजहों में शामिल है। कई मामलों में युवा बाइक पर ट्रिपलिंग करते, खतरनाक तरीके से ओवरटेक करते या चलते वाहन से वीडियो बनाते नजर आए हैं।

अप्रैल 2026 में मऊगंज जिले के पन्नी-पथरिया नेशनल हाईवे पर तीन युवकों की मौत का मामला सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, तीनों एक बाइक पर सवार थे और तेज रफ्तार में आगे निकलने की कोशिश के दौरान सड़क किनारे खड़े ईंट से लदे ट्रेलर से टकरा गए। हादसे में तीनों की मौत हो गई, जबकि पीछे से वीडियो बना रहे दूसरी बाइक सवार दो लोग भी दुर्घटना में घायल हुए थे।

सेल्फी और रील का जुनून भी जानलेवा

नरसिंहपुर में जुलाई में हुआ हादसा भी युवाओं के लिए चेतावनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे के किनारे सेल्फी लेने के दौरान युवाओं को तेज रफ्तार हाईवा ने कुचल दिया। इस दुर्घटना में कई लोगों की मौत हुई और कुछ घायल हुए।

इन घटनाओं से साफ है कि सड़क पर कुछ सेकेंड का रोमांच जिंदगी भर का दर्द बन सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली रील के लिए जोखिम उठाना युवाओं में लगातार बढ़ती चिंता का विषय है।

सिर्फ रफ्तार नहीं, सड़क व्यवस्था भी जिम्मेदार

सड़क हादसों के लिए केवल वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराना भी पर्याप्त नहीं है। कई हाईवे पर सड़क किनारे खड़े भारी वाहन, खराब लाइटिंग, अवैध कट, खराब संकेतक और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा इंतजामों की कमी भी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाती है।

हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 4,600 करोड़ रुपये की लागत से 12 प्रमुख सड़कों के निर्माण और उन्नयन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य सड़क ढांचे को बेहतर बनाना है, लेकिन सड़क सुरक्षा के लिए केवल सड़क का निर्माण पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षित डिजाइन, संकेतक, स्पीड कंट्रोल और दुर्घटना संभावित स्थानों की निगरानी भी जरूरी है।

मुफ्त इलाज को लेकर भी सवाल

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में हाईवे पर त्वरित एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर तक पहुंच और समय पर इलाज की व्यवस्था जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि हादसे में घायल लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा समय पर क्यों नहीं मिल पाई।

मध्य प्रदेश में हाईवे पर बढ़ते हादसे अब सिर्फ कानून-व्यवस्था या यातायात का मुद्दा नहीं रह गए हैं। यह युवाओं की सुरक्षा, सड़क इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल है। जरूरत है कि प्रशासन हाईवे के ब्लैक स्पॉट चिन्हित करे, तेज रफ्तार पर प्रभावी कार्रवाई करे और युवाओं के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए। तभी हाईवे को मौत के जाल में बदलने से रोका जा सकेगा।

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