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जन्म लेते ही दफनाई गई बच्ची को मां ने बचाया: डॉक्टर ने बताया था मृत, दरगाह में गुलाब गिरने से पड़ा नाम गुलाबो; सांपों से सीखा कालबेलिया नृत्य

जन्म लेते ही दफनाई गई बच्ची को मां ने बचाया: डॉक्टर ने बताया था मृत, दरगाह में गुलाब गिरने से पड़ा नाम गुलाबो; सांपों से सीखा कालबेलिया नृत्य

राजस्थान की मशहूर लोक कलाकार गुलाबो सपेरा की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जन्म के बाद ही जिस बच्ची को मृत समझकर दफना दिया गया था, वही आगे चलकर दुनिया भर में राजस्थान के प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य की पहचान बनी। संघर्ष, साहस और प्रतिभा से भरी गुलाबो की कहानी आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।

गुलाबो सपेरा का जन्म राजस्थान के अजमेर जिले के कोटड़ा गांव में हुआ था। बताया जाता है कि उनके जन्म के समय समाज में लड़कियों को लेकर कई तरह की कुरीतियां मौजूद थीं। जन्म के बाद डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिवार वालों ने उसे दफना दिया। लेकिन करीब छह घंटे बाद मां ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी और उसे जमीन से बाहर निकालकर बचा लिया।

दरगाह में गुलाब गिरने से पड़ा नाम गुलाबो

गुलाबो के जीवन से जुड़ी एक खास कहानी उनके नाम को लेकर भी बताई जाती है। कहा जाता है कि उनकी मां उन्हें लेकर एक दरगाह गई थीं। वहां चढ़ाया गया एक गुलाब का फूल उनकी गोद में गिर गया। इसी घटना के बाद बच्ची का नाम गुलाबो रखा गया।

बचपन से ही गुलाबो का जीवन काफी संघर्षों भरा रहा। कालबेलिया समुदाय से आने के कारण उन्हें कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपनी कला को अपनी ताकत बनाया और दुनिया के मंच तक पहुंचाया।

सांपों को देखकर सीखा कालबेलिया नृत्य

गुलाबो सपेरा ने कालबेलिया नृत्य को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बचपन में वह सपेरा समुदाय के साथ रहती थीं और सांपों की गतिविधियों को करीब से देखती थीं। उन्हीं की चाल और लहराती गति से प्रेरणा लेकर उन्होंने नृत्य की अपनी अनोखी शैली विकसित की।

उनका नृत्य देखने में सांपों की लय और गति जैसा दिखाई देता है। काले रंग की पारंपरिक पोशाक और शरीर की लचक के साथ उनकी प्रस्तुति ने देश-विदेश में लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

विदेशों तक पहुंचाई राजस्थान की संस्कृति

गुलाबो सपेरा ने कालबेलिया नृत्य को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कई देशों में कार्यक्रम प्रस्तुत किए और राजस्थान की लोक संस्कृति का प्रचार किया। उनकी कला के योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिले हैं।

गुलाबो की कहानी सिर्फ एक कलाकार की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस हौसले की मिसाल है जिसमें एक बच्ची, जिसे जन्म के बाद जीवन का अधिकार तक नहीं मिला था, आगे चलकर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई।

आज गुलाबो सपेरा का नाम राजस्थान की लोक कला और कालबेलिया नृत्य की पहचान के रूप में लिया जाता है। उनकी जिंदगी संघर्षों से निकलकर सफलता हासिल करने की एक अनोखी मिसाल है।

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