मुरैना के क्रिकेटर ने बदली किस्मत, हरे चारे की खेती से कमा रहे लाखों: 5 साल में 5 बीघा से बढ़ाकर 100 बीघा किया रकबा
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक क्रिकेटर ने खेती को नया करियर बनाकर मिसाल पेश की है। खेल के मैदान से जुड़े रहने वाले इस युवा किसान ने जब हरे चारे की खेती शुरू की तो शुरुआत में रकबा काफी कम था, लेकिन मेहनत और नई तकनीक के दम पर आज उन्होंने खेती का विस्तार कई गुना बढ़ा लिया है।
कभी क्रिकेट में करियर बनाने का सपना देखने वाले इस किसान ने अब खेती को अपनी पहचान बना लिया है। उन्होंने हरे चारे की खेती में ऐसा प्रयोग किया कि महज 5 साल में 5 बीघा जमीन से बढ़ाकर 100 बीघा तक खेती का दायरा पहुंचा दिया।
वन टाइम इन्वेस्टमेंट, 15 साल तक कमाई का दावा
किसान के अनुसार, हरे चारे की खेती में शुरुआत में एक बार निवेश करना पड़ता है, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक इससे कमाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सही तरीके से खेती करने पर यह फसल करीब 15 साल तक लगातार उत्पादन दे सकती है।
कम लागत और लगातार मांग के कारण हरे चारे की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। पशुपालकों की ओर से पूरे साल हरे चारे की जरूरत रहती है, जिससे बाजार भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
क्रिकेट से खेती तक का सफर
मुरैना के इस किसान का कहना है कि वह पहले क्रिकेट खेलते थे और खेल के जरिए आगे बढ़ना चाहते थे। लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने खेती की ओर रुख किया।
उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय ऐसी फसल चुनने का फैसला किया, जिससे कम जोखिम में बेहतर आमदनी हो सके। इसी सोच के साथ उन्होंने हरे चारे की खेती शुरू की।
5 बीघा से शुरू हुआ सफर
शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 5 बीघा जमीन पर हरे चारे की खेती की। अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे इसका क्षेत्र बढ़ाना शुरू किया।
आज उनकी खेती का रकबा बढ़कर 100 बीघा तक पहुंच गया है। वह न सिर्फ खुद इससे कमाई कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
पशुपालकों के लिए भी बना सहारा
हरे चारे की खेती से आसपास के पशुपालकों को भी फायदा हो रहा है। उन्हें सालभर पौष्टिक चारा उपलब्ध हो जाता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में सुधार आता है।
किसान का कहना है कि खेती में सफलता के लिए सही फसल का चुनाव, आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग को समझना जरूरी है।
किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल
मुरैना के इस किसान ने साबित कर दिया है कि खेती को भी आधुनिक सोच और सही योजना के साथ लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। क्रिकेट के मैदान से खेती के खेत तक का उनका सफर अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
हरे चारे की खेती के जरिए उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि यह भी दिखाया कि मेहनत और नई सोच से किसान अपनी आय के नए रास्ते बना सकते हैं।

