मध्यप्रदेश में खसरे के 1400 से ज्यादा केस: भोपाल चौथे नंबर पर, भिंड-शिवपुरी-ग्वालियर में सबसे ज्यादा मामले
मध्यप्रदेश में खसरे के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक 1400 से अधिक खसरे के मामले सामने आ चुके हैं। जिलावार आंकड़ों में भोपाल चौथे स्थान पर है, जबकि सबसे ज्यादा मामले भिंड, शिवपुरी और ग्वालियर जिलों में दर्ज किए गए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से निगरानी और टीकाकरण अभियान पर जोर दिया जा रहा है।
टॉप-3 में भिंड, शिवपुरी और ग्वालियर
खसरे के मामलों के लिहाज से प्रदेश में भिंड पहले, शिवपुरी दूसरे और ग्वालियर तीसरे स्थान पर है। भोपाल चौथे नंबर पर है। इन जिलों में बच्चों में खसरे के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
खसरा मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करने वाली संक्रामक बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने पर इसका संक्रमण फैल सकता है। बीमारी में बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, खांसी, नाक बहना और आंखों में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
बच्चों के लिए टीकाकरण सबसे अहम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एमआर वैक्सीन है। बच्चों को निर्धारित उम्र में खसरा-रूबेला का टीका लगवाना जरूरी है। जिन बच्चों का टीकाकरण छूट गया है, उनके टीकाकरण पर भी स्वास्थ्य विभाग विशेष ध्यान दे रहा है।
अधिकारियों की ओर से मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को संदिग्ध मामलों की पहचान कर तत्काल सूचना देने और संक्रमित बच्चों के संपर्क में आए लोगों की निगरानी के निर्देश दिए जाते हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।
लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क
खसरे के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल दाने दिखाई दें तो अभिभावकों को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखने और डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी जाती है।
प्रदेश में 1400 से अधिक मामलों का सामने आना यह बताता है कि खसरे की रोकथाम के लिए टीकाकरण और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है। खासतौर पर उन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता महत्वपूर्ण है, जहां मामलों की संख्या अधिक दर्ज की गई है।

