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हर साल 1200 से ज्यादा आग की घटनाएं, फिर भी जिम्मेदारी तय नहीं! फायर एक्ट नहीं, लापरवाही बन रही बड़ी वजह

हर साल 1200 से ज्यादा आग की घटनाएं, फिर भी जिम्मेदारी तय नहीं! फायर एक्ट नहीं, लापरवाही बन रही बड़ी वजह

शहर में हर वर्ष 1,200 से अधिक छोटी-बड़ी आग लगने की घटनाएं दर्ज होती हैं। हर बार फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लेती है और पुलिस औपचारिक एफआईआर दर्ज कर अपनी प्रक्रिया पूरी कर देती है। लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि इन हादसों के लिए जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है? इसका जवाब अक्सर नहीं मिलता।

आग की घटनाओं के बाद संबंधित विभागों का एक ही तर्क सामने आता है कि मध्यप्रदेश में अलग से फायर एक्ट लागू नहीं होने के कारण सख्त कार्रवाई करना संभव नहीं है। हालांकि, पड़ताल में सामने आया है कि यह तर्क पूरी तरह सही नहीं है। मौजूदा कानूनों और अधिनियमों में ही ऐसे कई प्रावधान मौजूद हैं, जिनके आधार पर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अग्नि सुरक्षा, ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, खतरनाक व्यापार, भवन सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कई नियम पहले से लागू हैं। इन कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने, लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार संबंधित विभागों के पास मौजूद है।

इसके बावजूद अधिकांश मामलों में जांच केवल आग बुझाने और प्रारंभिक रिपोर्ट तक सीमित रह जाती है। हादसे के कारणों की गहराई से जांच, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जिम्मेदारी तय करना और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। यही वजह है कि एक जैसी लापरवाही बार-बार दोहराई जाती है और आग की घटनाओं में कमी नहीं आ पाती।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फायर एक्ट की अनुपस्थिति को जिम्मेदार ठहराने के बजाय मौजूदा कानूनी प्रावधानों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। यदि प्रत्येक आग की घटना के बाद विस्तृत जांच कर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तो भविष्य में ऐसे हादसों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

शहर में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों, बहुमंजिला इमारतों, गोदामों और ज्वलनशील सामग्री के भंडारण को देखते हुए अग्नि सुरक्षा को लेकर सख्ती और जवाबदेही तय करना समय की मांग बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट, सुरक्षा मानकों का पालन, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई से आग की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

ऐसे में सवाल केवल नए फायर एक्ट का नहीं, बल्कि मौजूदा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन का भी है। यदि संबंधित एजेंसियां उपलब्ध कानूनी अधिकारों का पूरी गंभीरता से इस्तेमाल करें, तो आग की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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