हर बच्चे पर हर महीने 12 हजार से ज्यादा खर्च, फिर भी 12 साल में स्कूल की बिल्डिंग नहीं बनी
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और निर्माण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक ऐसे स्कूल में जहां केंद्र सरकार की ओर से हर बच्चे पर हर महीने 12 हजार रुपये से अधिक का अनुदान दिया जा रहा है, वहां 12 साल बीतने के बावजूद स्कूल की स्थायी बिल्डिंग तक तैयार नहीं हो सकी। स्कूल का पूरा खर्च केंद्र सरकार की ओर से उठाए जाने के बावजूद भवन निर्माण में लगातार देरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित स्कूल को बच्चों की पढ़ाई, शिक्षण व्यवस्था और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए नियमित रूप से अनुदान मिल रहा है। प्रति विद्यार्थी मिलने वाली राशि को देखें तो हर बच्चे पर हर महीने 12 हजार रुपये से अधिक खर्च का प्रावधान है। इसके बावजूद स्कूल के पास अपनी पक्की और पर्याप्त इमारत नहीं होना चिंताजनक स्थिति है।
बताया जा रहा है कि स्कूल की स्थापना को करीब 12 साल हो चुके हैं। इतने लंबे समय में स्कूल के लिए स्थायी भवन तैयार नहीं किया जा सका। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को रोजाना कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त कमरों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में भी दिक्कतें आती हैं।
स्कूल का खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने के बावजूद भवन निर्माण पूरा नहीं होने को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह जानने की जरूरत महसूस की जा रही है कि भवन निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी राशि जारी की गई और अब तक उसका किस तरह उपयोग किया गया।
मामले में निर्माण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यदि भवन निर्माण के लिए पहले ही बजट उपलब्ध कराया गया था तो इतने वर्षों तक काम पूरा क्यों नहीं हुआ, यह बड़ा सवाल है। वहीं, यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से निर्माण अटका हुआ है तो उसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए।
स्कूल से जुड़े लोगों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए स्थायी भवन बेहद जरूरी है। स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। ऐसे में लंबे समय से लंबित भवन निर्माण को जल्द पूरा करने की मांग उठ सकती है।
फिलहाल यह मामला सरकारी अनुदान के प्रभावी इस्तेमाल और स्कूलों में आधारभूत ढांचे के विकास को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रति बच्चे हर महीने 12 हजार रुपये से अधिक की राशि खर्च होने के बावजूद 12 साल में भवन तैयार नहीं होना प्रशासन के लिए जांच का विषय है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या जवाब देता है और स्कूल की बिल्डिंग का निर्माण कब तक पूरा होता है।

