चेक बाउंस के 1 लाख से ज्यादा मामलों में आएगी तेजी, अब बढ़ेंगी सुनवाई करने वाली अदालतें
जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबित चेक बाउंस के एक लाख से अधिक मामलों के निपटारे में अब तेजी आने की उम्मीद है। इन मामलों की सुनवाई के लिए अब तक केवल 5 प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) कोर्ट निर्धारित थीं। मामलों की बड़ी संख्या और सीमित अदालतों के कारण सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। अब इन मामलों की सुनवाई को गति देने की तैयारी की जा रही है, जिससे लंबित प्रकरणों के निपटारे का रास्ता आसान हो सकता है।
चेक बाउंस से जुड़े मामले आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से भुगतान के लिए दिया गया चेक बैंक में जमा करने पर पर्याप्त राशि नहीं होने या अन्य निर्धारित कारणों से भुगतान के बिना वापस हो जाता है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। लंबे समय तक सुनवाई चलने से शिकायतकर्ता और आरोपी, दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
एक लाख से अधिक मामले लंबित
जिला एवं सत्र न्यायालय में चेक बाउंस के एक लाख से अधिक मामले लंबित होना न्यायिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। इतनी बड़ी संख्या में प्रकरणों की सुनवाई के लिए केवल पांच जेएमएफसी कोर्ट निर्धारित होने से प्रत्येक अदालत पर काम का दबाव बना हुआ था।
लंबित मामलों का समय पर निपटारा नहीं होने से शिकायतकर्ताओं को भुगतान मिलने में देरी हो सकती है। वहीं, आरोपियों को भी लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सुनवाई की व्यवस्था को मजबूत करना और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना जरूरी माना जा रहा है।
सुनवाई में तेजी लाने की तैयारी
चेक बाउंस के मामलों की सुनवाई के लिए अधिक न्यायिक संसाधन उपलब्ध कराने से प्रकरणों को निपटाने में मदद मिल सकती है। यदि सुनवाई के लिए अदालतों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो मामलों का बोझ अलग-अलग अदालतों में बंट सकेगा। इससे सुनवाई की तारीखें तय करने और लंबित प्रकरणों पर नियमित कार्रवाई करने में सुविधा हो सकती है।
हालांकि, कितनी नई अदालतों को इन मामलों की जिम्मेदारी दी जाएगी और व्यवस्था कब से लागू होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या है चेक बाउंस का मामला?
चेक बाउंस से जुड़े मामलों में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, बशर्ते मामले में कानून की निर्धारित शर्तें पूरी होती हों। इसमें चेक को निर्धारित समय के भीतर बैंक में प्रस्तुत करना, भुगतान न होने की स्थिति में कानूनी नोटिस देना और निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर शिकायत दर्ज करना शामिल है।
इस कानून का उद्देश्य चेक के माध्यम से होने वाले भुगतान में भरोसा बनाए रखना और निर्धारित परिस्थितियों में भुगतान न होने पर कानूनी उपाय उपलब्ध कराना है।
लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगी नजर
एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। अतिरिक्त न्यायिक व्यवस्था, नियमित सुनवाई और प्रभावी केस प्रबंधन से लंबित प्रकरणों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
फिलहाल, पांच जेएमएफसी कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। नई व्यवस्था के तहत अदालतों की संख्या बढ़ाने या सुनवाई का तरीका बदलने से संबंधित आधिकारिक विवरण मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लंबित मामलों के निपटारे में कितनी तेजी आएगी।

