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सतना जिला अस्पताल में क्षमता से ज्यादा मरीज, 400 बेड पर 550 से ज्यादा भर्ती; शिशु वार्ड में भी बढ़ा दबाव

सतना जिला अस्पताल में क्षमता से ज्यादा मरीज, 400 बेड पर 550 से ज्यादा भर्ती; शिशु वार्ड में भी बढ़ा दबाव

मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। अस्पताल में कुल 400 बेड की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में यहां 550 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शिशु वार्ड और PICU में देखने को मिल रही है, जहां उपलब्ध बेड से कई गुना अधिक बच्चे इलाज करा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के 22 बेड वाले शिशु वार्ड में 62 बच्चे भर्ती हैं। वहीं गंभीर बच्चों के इलाज के लिए बने PICU के 9 बेड पर 22 मरीजों का उपचार चल रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर भी काम का दबाव बढ़ गया है।

बच्चों के वार्ड में सबसे ज्यादा दबाव

मौसम में बदलाव और मौसमी बीमारियों के कारण बच्चों में संक्रमण, बुखार, निमोनिया और अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके चलते शिशु वार्ड में लगातार मरीजों की भर्ती हो रही है। कम बेड होने के कारण कई बच्चों को अतिरिक्त व्यवस्था के तहत भर्ती रखना पड़ रहा है।

PICU में गंभीर स्थिति वाले बच्चों को रखा जाता है, लेकिन यहां भी क्षमता से अधिक मरीज होने के कारण स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।

अस्पताल प्रबंधन के सामने चुनौती

जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते वार्डों में जगह की कमी की स्थिति बन गई है। सामान्य वार्डों के अलावा बच्चों के विभाग में भी अतिरिक्त बेड लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की टीमें लगातार मरीजों की निगरानी कर रही हैं और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल

एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पतालों में बढ़ता मरीज भार संसाधनों की कमी को उजागर कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ अस्पतालों में बेड, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता भी बढ़ाना जरूरी है।

सतना जिला अस्पताल में मौजूदा स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त इंतजामों की जरूरत महसूस की जा रही है। आने वाले दिनों में अगर मरीजों की संख्या और बढ़ती है तो अस्पताल प्रशासन के सामने चुनौती और बढ़ सकती है।

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