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मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी, जुलाई में पहली बार बारिश का आंकड़ा माइनस में पहुंचा; 3% कम हुई बारिश

मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी, जुलाई में पहली बार बारिश का आंकड़ा माइनस में पहुंचा; 3% कम हुई बारिश

मध्य प्रदेश में मानसून की चाल इस बार कुछ धीमी नजर आ रही है। जुलाई महीने में पहली बार प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के अनुसार, प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 3 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मानसून सीजन में जुलाई को सबसे महत्वपूर्ण महीनों में माना जाता है, लेकिन इस बार बारिश की कमी ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असमान वितरण देखने को मिल रहा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में हालात ज्यादा खराब हैं। जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग में औसत से करीब 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की सक्रियता में कमी और बारिश वाले सिस्टमों की कमजोर स्थिति के कारण प्रदेश में अपेक्षित बारिश नहीं हो पा रही है। जुलाई में लगातार बारिश के दौर की उम्मीद रहती है, लेकिन कई क्षेत्रों में बादल तो छाए रहे, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी।

किसानों की बढ़ी चिंता

मध्य प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जुलाई का महीना बेहद अहम होता है। सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य फसलों के लिए पर्याप्त बारिश जरूरी होती है। बारिश कम होने से कई इलाकों में किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की वृद्धि पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी मानसून सीजन बाकी है और आने वाले समय में सक्रिय सिस्टम बनने से बारिश की कमी पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कई जिलों में बारिश का इंतजार

प्रदेश के कई जिलों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग लगातार बारिश की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाले सिस्टम की सक्रियता के आधार पर प्रदेश में बारिश की स्थिति में बदलाव आ सकता है।

फिलहाल मध्य प्रदेश में मानसून कमजोर दौर से गुजर रहा है। जुलाई में बारिश का आंकड़ा माइनस में पहुंचना मौसम के बदलते रुख का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

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