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मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी: 16.3 इंच बारिश, औसत से 18% कम; 49 जिलों में सूखे जैसे हालात

मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी: 16.3 इंच बारिश, औसत से 18% कम; 49 जिलों में सूखे जैसे हालात

मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अब तक उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है। प्रदेश में इस बार बारिश का आंकड़ा औसत से काफी पीछे चल रहा है। अब तक राज्य में करीब 16.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 18 फीसदी कम है। कम बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 49 जिलों में बारिश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं। वहीं केवल 6 जिले ही ऐसे हैं, जहां बारिश की स्थिति सामान्य या बेहतर बनी हुई है।

कई जिलों में खेती पर मंडराया संकट

मानसून की धीमी रफ्तार का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई के बाद किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार था, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों पर संकट गहराने लगा है। कई इलाकों में खेतों में नमी कम होने से फसल की वृद्धि प्रभावित हो रही है।

किसानों को अब आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद है। अगर मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

बड़े शहरों में भी बारिश की कमी

प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी इस बार बारिश का आंकड़ा संतोषजनक नहीं रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन जैसे जिलों में सामान्य बारिश की तुलना में कमी दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में जलस्रोतों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में लोग लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बादल तो छा रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर पर्याप्त बारिश नहीं हो पा रही है।

मौसम विभाग की नजर मानसून सिस्टम पर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश में बारिश की कमी का मुख्य कारण सक्रिय मानसूनी सिस्टम का कमजोर रहना है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से बनने वाले सिस्टम कमजोर होने के कारण प्रदेश में बारिश का वितरण असमान बना हुआ है।

हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। यदि मानसून सिस्टम सक्रिय होता है तो बारिश की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है।

सरकार और प्रशासन अलर्ट

कम बारिश को देखते हुए प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जिला स्तर पर जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति और किसानों की समस्याओं की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हैं, ताकि सूखे जैसे हालात से राहत मिल सके।

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