मध्य प्रदेश में मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण जून महीना इस बार काफी हद तक सूखा बीत रहा है। राज्य में सामान्य बारिश के मुकाबले इस बार काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे गर्मी और उमस का असर भी बढ़ गया है।
आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक राज्य में औसतन 70.9 मिमी (लगभग 2.8 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक केवल 34.3 मिमी (करीब 1.3 इंच) वर्षा ही दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 52 प्रतिशत कम है, जो कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत कुल 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी की स्थिति कमजोर बनी हुई है, जिससे खरीफ सीजन की बुवाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की धीमी गति के कारण बारिश में यह अंतर देखा जा रहा है, हालांकि आने वाले दिनों में मौसम के सक्रिय होने की संभावना जताई गई है। यदि मानसून गति पकड़ता है, तो जुलाई में बारिश की स्थिति में सुधार हो सकता है।
फिलहाल, राज्य में सूखे जैसे हालात ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में इस बार जून का महीना बारिश की कमी के कारण सामान्य से काफी अलग और चुनौतीपूर्ण रहा है।

