शहर में दूध में मिलावट की शिकायतों पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर ली है। उज्जैन में अब सड़क पर ही दूध की LIVE जांच की जाएगी। इसके लिए रैपिड टेस्ट की मदद ली जाएगी, जिससे मौके पर ही दूध की गुणवत्ता और संभावित मिलावट का पता लगाया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य दूध की जांच प्रक्रिया को तेज करना और मिलावट करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
अब तक दूध के सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेजे जाने के बाद रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण कार्रवाई में भी देरी होती थी। रैपिड टेस्ट व्यवस्था से शुरुआती जांच मौके पर ही हो सकेगी और संदिग्ध नमूनों को आगे की विस्तृत जांच के लिए भेजा जा सकेगा।
सड़क पर होगी दूध की जांच
नई व्यवस्था के तहत खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारी और जांच दल अलग-अलग इलाकों में दूध विक्रेताओं तथा सप्लाई से जुड़े स्थानों पर पहुंचकर नमूने ले सकते हैं। मौके पर ही रैपिड टेस्ट के जरिए दूध की प्राथमिक जांच की जाएगी।
जांच के दौरान यदि दूध की गुणवत्ता संदिग्ध पाई जाती है या किसी तरह की मिलावट का संकेत मिलता है, तो संबंधित नमूने को आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा सकता है। इससे मिलावट की पुष्टि करने और नियमानुसार कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
तुरंत मिल सकेगा शुरुआती नतीजा
रैपिड टेस्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता। मौके पर होने वाली प्राथमिक जांच से अधिकारियों को तत्काल संकेत मिल सकता है कि दूध सामान्य है या उसमें किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका है। हालांकि, मौके पर होने वाला रैपिड टेस्ट अंतिम कानूनी रिपोर्ट का विकल्प नहीं होगा। गंभीर मामलों में नमूने को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकृत प्रयोगशाला में भेजकर विस्तृत जांच कराई जा सकती है।
मिलावटखोरों पर कार्रवाई की तैयारी
दूध में मिलावट स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जांच अभियान को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। यदि किसी विक्रेता या सप्लायर के नमूने में नियमों के विपरीत मिलावट पाई जाती है, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों की कोशिश है कि नियमित जांच के जरिए दूध की गुणवत्ता पर नजर रखी जाए और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचे।
उपभोक्ताओं को भी मिलेगी राहत
दूध रोजमर्रा की जरूरत का महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। बड़ी संख्या में परिवार सीधे दूध खरीदकर उसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मौके पर जांच की व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए भी राहत देने वाली हो सकती है। प्रशासन की ओर से अभियान को लगातार चलाने और संदिग्ध नमूनों की जांच करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे दूध कारोबारियों में भी गुणवत्ता मानकों के पालन को लेकर दबाव बढ़ेगा।
उज्जैन में सड़क पर दूध की LIVE जांच की पहल का उद्देश्य मिलावट की पहचान को तेज करना और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। अब अभियान कितना प्रभावी साबित होता है और जांच के दौरान कितने नमूने संदिग्ध पाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।a

