उज्जैन नगर निगम के कार्यक्रम में भी नहीं पहुंचे महापौर टटवाल, रथ विवाद के बाद बढ़ी चर्चाएं
उज्जैन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को स्वागत रथ से नीचे उतारे जाने का विवाद अब नगर निगम के कार्यक्रमों तक चर्चा में है। रोड शो के बाद गुरुवार को नगर निगम का पहला बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें भाजपा के विधायक, नगर निगम अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य, पार्षद और पार्षद प्रतिनिधि एक साथ नजर आए, लेकिन महापौर मुकेश टटवाल दोनों आयोजनों से दूर रहे। इसके बाद निगम और भाजपा की स्थानीय राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नितिन नवीन के उज्जैन रोड शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल के रथ पर सवार होने और कुछ देर बाद उन्हें नीचे उतरने के लिए कहे जाने की घटना सामने आई थी। टटवाल के अनुसार, वे पार्टी पदाधिकारियों के कहने पर रथ पर सवार हुए थे। कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा ने भी बताया था कि रथ पर सवार होने वाले नेताओं की सूची में महापौर का नाम शामिल था, हालांकि उन्हें बाद में किसने और किस कारण से नीचे उतारा, इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही थी।
घटना के बाद महापौर ने नाराजगी जताई थी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन विरोध की घोषणा की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात और आश्वासन के बाद उन्होंने प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम वापस ले लिया।
इधर, गुरुवार को नगर निगम का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भाजपा से जुड़े नगर निगम के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। विधायक, निगम अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य, पार्षद और पार्षद प्रतिनिधि कार्यक्रम में एक साथ दिखाई दिए। लेकिन महापौर टटवाल की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को फिर हवा दे दी।
महापौर के लगातार दो प्रमुख आयोजनों से दूर रहने को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी के पीछे आधिकारिक तौर पर क्या कारण है, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में इसे सीधे तौर पर किसी राजनीतिक विवाद का परिणाम मानने से पहले महापौर या नगर निगम की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार करना होगा।
रथ विवाद के बाद भाजपा संगठन और नगर निगम के बीच संबंधों को लेकर पहले भी सवाल उठे थे। कुछ रिपोर्टों में महापौर की पार्टी के कार्यक्रमों में कथित उपेक्षा को लेकर भी चर्चा हुई थी। वहीं, इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर सवाल उठाए थे।
फिलहाल गुरुवार के नगर निगम कार्यक्रम में महापौर की अनुपस्थिति ने उज्जैन की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में महापौर निगम के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं या नहीं और पार्टी स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।

