चचेरी बहन से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सजा, बहाने से खेत में ले जाकर की थी वारदात
मध्य प्रदेश के गुना जिले में नाबालिग चचेरी बहन से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला सिरसी थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी ने अपनी ही चचेरी बहन को बहाने से बुलाकर खेत की ओर ले गया था। वहां उसने उसके साथ जबरदस्ती की। मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में हुई, जहां दोष साबित होने के बाद सोमवार को आरोपी को सजा सुनाई गई।
बहाने से खेत की ओर ले गया था आरोपी
अभियोजन के अनुसार आरोपी ने नाबालिग पीड़िता को किसी बहाने से अपने साथ चलने के लिए कहा था। वह उसे खेत की ओर ले गया। सुनसान स्थान पर पहुंचने के बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने परिवार को मामले की जानकारी दी।
परिजनों ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पॉक्सो एक्ट के तहत चला मामला
पीड़िता नाबालिग होने के कारण पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की। जांच के दौरान पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य जुटाए और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में हुई।
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय के सामने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना।
कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा
मामले में सोमवार को कोर्ट ने आरोपी को 20 साल जेल की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। अदालत के फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में सख्त कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना और ऐसे मामलों में प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नाबालिग से जुड़े मामलों में अदालत पीड़ित की सुरक्षा और गोपनीयता को भी प्राथमिकता देती है।
परिवार के रिश्ते पर भी उठे सवाल
इस मामले में आरोपी और पीड़िता के बीच पारिवारिक रिश्ता होने के कारण घटना ने परिवार और आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया। भरोसे के रिश्ते में इस तरह की वारदात सामने आने से लोगों में नाराजगी रही।
पुलिस और अभियोजन की कार्रवाई के बाद अब अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। मामले में कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

