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जबलपुर में राशन कार्ड का बड़ा फर्जीवाड़ा, 5 हजार से ज्यादा परिवार निकले अपात्र; सालाना आय 6 लाख से अधिक फिर भी ले रहे थे सरकारी अनाज

जबलपुर में राशन कार्ड का बड़ा फर्जीवाड़ा, 5 हजार से ज्यादा परिवार निकले अपात्र; सालाना आय 6 लाख से अधिक फिर भी ले रहे थे सरकारी अनाज

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बीपीएल यानी गरीबी रेखा से जुड़े राशन कार्ड की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच के दौरान 5 हजार से ज्यादा ऐसे परिवार मिले हैं, जिनकी सालाना आय 6 लाख रुपए से अधिक है। इसके बावजूद ये परिवार कई वर्षों से गरीबी रेखा के राशन कार्ड के आधार पर सरकारी अनाज का लाभ उठा रहे थे।

प्रशासन की ओर से जिले में पात्र और अपात्र राशन कार्ड धारकों की पहचान के लिए जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे परिवार सामने आए, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद बीपीएल श्रेणी में शामिल थे। अब प्रशासन इन राशन कार्डों की पात्रता की दोबारा जांच कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए परिवारों की आय निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाई गई। इनमें कई परिवारों की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक है। इसके बावजूद उनके पास गरीबी रेखा का राशन कार्ड मौजूद था और वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकारी अनाज प्राप्त कर रहे थे।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने अपात्र परिवारों के राशन कार्डों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे परिवारों के नाम पात्रता सूची से हटाए जाने के साथ ही अब तक लिए गए सरकारी राशन की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में जानबूझकर गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों से नियमों के तहत वसूली भी की जा सकती है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राशन कार्ड का लाभ केवल पात्र परिवारों को ही मिलना चाहिए। अपात्र लोगों के सरकारी खाद्यान्न लेने से वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को नुकसान होता है। इसलिए राशन कार्ड की जांच के जरिए ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है।

जांच में आय के अलावा परिवार की आर्थिक स्थिति और अन्य सरकारी रिकॉर्ड का भी मिलान किया जा सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड और अलग-अलग विभागों से उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपात्र परिवारों की पहचान की जा रही है।

गरीब परिवारों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली संचालित की जाती है। ऐसे में फर्जी या गलत तरीके से बनाए गए राशन कार्ड इस व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती हैं। प्रशासन का अभियान इसी तरह के अपात्र लाभार्थियों को सूची से बाहर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

अब 5 हजार से अधिक अपात्र परिवारों के सामने आने के बाद जिले में राशन कार्डों की जांच और तेज होने की संभावना है। प्रशासन की कार्रवाई से सरकारी अनाज का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वालों पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।

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