Samachar Nama
×

दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर बड़ी कार्रवाई, उज्जैन अखाड़ा परिषद ने साधु समाज से किया बहिष्कृत

दुष्कर्म के आरोपी महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर बड़ी कार्रवाई, उज्जैन अखाड़ा परिषद ने साधु समाज से किया बहिष्कृत

दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उज्जैन की स्थानीय अखाड़ा परिषद ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें साधु समाज से बहिष्कृत कर दिया है। परिषद ने न केवल ज्ञानदास के धार्मिक आयोजनों में शामिल होने पर रोक लगाई है, बल्कि निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज को पत्र भेजकर उन्हें महामंडलेश्वर पद से तत्काल हटाने की मांग भी की है।

अखाड़ा परिषद के इस फैसले के बाद संत समाज में भी हलचल तेज हो गई है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि उज्जैन के मठों, आश्रमों और अखाड़ों में आयोजित होने वाले किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में ज्ञानदास को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए लिया गया है।

धार्मिक आयोजनों में प्रवेश पर लगी रोक

स्थानीय अखाड़ा परिषद ने अपने आदेश में कहा है कि साधु समाज की मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। परिषद के अनुसार, जब तक मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक ज्ञानदास को धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जाएगा।

परिषद ने निर्मोही अखाड़े के शीर्ष पदाधिकारियों से भी इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की है। पत्र के माध्यम से महामंडलेश्वर पद से हटाने की मांग को संत समाज में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

निर्मोही अखाड़े पर भी बढ़ा दबाव

ज्ञानदास निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर पद पर हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग के बाद अब अखाड़े के नेतृत्व पर भी फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है। संत समाज का एक वर्ग लगातार मांग कर रहा है कि गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति को धार्मिक पद पर बनाए रखना उचित नहीं है।

हालांकि, इस मामले में निर्मोही अखाड़े की ओर से अभी तक अंतिम निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संत समाज में चर्चा का विषय बना मामला

ज्ञानदास से जुड़ा मामला अब उज्जैन समेत देशभर के संत समाज में चर्चा का विषय बन गया है। अखाड़ा परिषद की कार्रवाई के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आने वाले दिनों में निर्मोही अखाड़े की ओर से लिए जाने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

अखाड़ा परिषद का कहना है कि साधु समाज की गरिमा और धार्मिक संस्थाओं की छवि को बनाए रखना सबसे जरूरी है। इसी उद्देश्य से ज्ञानदास के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।

Share this story

Tags