अनाज भंडारण में मध्य प्रदेश की बड़ी छलांग, पंजाब-हरियाणा को पीछे छोड़ा; 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ टॉप-5 में शामिल
देश में अनाज भंडारण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कभी कृषि उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाला मध्य प्रदेश अब अनाज भंडारण क्षमता के मामले में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से आगे निकल गया है। राज्य में करीब 35 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण की क्षमता विकसित हो चुकी है, जिसके साथ मध्य प्रदेश देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल हो गया है।
यह उपलब्धि राज्य में कृषि क्षेत्र के विस्तार और भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
देश की कुल भंडारण क्षमता में 63% हिस्सेदारी
अनाज भंडारण के मामले में देश के कुछ प्रमुख राज्यों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश ने अपनी भंडारण क्षमता बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
राज्य में तैयार किए गए गोदामों और भंडारण केंद्रों से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है। इससे फसल खराब होने की आशंका कम होगी और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
पंजाब-हरियाणा को छोड़ा पीछे
देश में लंबे समय से पंजाब और हरियाणा को अनाज उत्पादन और भंडारण के प्रमुख केंद्रों के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन अब मध्य प्रदेश ने अपनी भंडारण क्षमता में तेजी से वृद्धि कर इन राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में गेहूं, धान और अन्य फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ भंडारण सुविधाओं का विस्तार भी किया गया है।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
भंडारण क्षमता बढ़ने से किसानों को अपनी फसल तुरंत बेचने की मजबूरी कम होगी। वे उचित समय पर बाजार में फसल बेचकर बेहतर कीमत हासिल कर सकेंगे।
इसके अलावा, सरकारी खरीद प्रक्रिया को भी इससे मजबूती मिलेगी, क्योंकि खरीदी गई फसलों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी।
सहकारी क्षेत्र और आधुनिक गोदामों पर जोर
मध्य प्रदेश में अनाज भंडारण को बढ़ावा देने के लिए सहकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है। आधुनिक तकनीक से लैस गोदामों और साइलो निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।
इन प्रयासों का उद्देश्य फसल के सुरक्षित रखरखाव के साथ-साथ कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
कृषि क्षेत्र में बढ़ती भूमिका
मध्य प्रदेश पहले से ही देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल है। गेहूं, सोयाबीन और अन्य फसलों के उत्पादन में राज्य की अहम भूमिका है।
अब अनाज भंडारण क्षमता में सुधार के साथ मध्य प्रदेश कृषि उत्पादन के साथ-साथ कृषि प्रबंधन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में भंडारण सुविधाओं के और विस्तार से किसानों और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

