एमपी से आंध्रप्रदेश को बाघ और गौर देने की तैयारी, बदले में वन्यजीव आदान-प्रदान का प्रस्ताव
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी एक अहम पहल के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर (भारतीय बाइसन) की मांग की गई है। इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया है कि बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स (ढोल) या अन्य वन्य प्राणियों को प्राप्त करने के प्रयास किए जाएं, ताकि दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का संतुलित आदान-प्रदान हो सके।
इस संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल एक राज्य की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय स्तर का प्रयास है, जिसमें राज्यों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस प्रस्ताव पर वन विभाग विस्तृत कार्ययोजना तैयार करे और सभी आवश्यक कानूनी व तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाए।
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मध्यप्रदेश देश में बाघों की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्यों में से एक है और यहां के संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कुछ अन्य राज्यों की मांग पर बाघों के ट्रांसलोकेशन (स्थानांतरण) की संभावना पर विचार किया जा रहा है, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी बाघ संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
इसी तरह गौर (भारतीय बाइसन), जो मध्यप्रदेश के कुछ वन क्षेत्रों में पाया जाता है, उसके संरक्षण और पुनर्वास के लिए भी योजनाएं चल रही हैं। आंध्रप्रदेश द्वारा इसकी मांग को देखते हुए विशेषज्ञों की राय ली जा रही है कि किन परिस्थितियों में सुरक्षित स्थानांतरण संभव हो सकता है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि वन्यजीवों का आदान-प्रदान केवल संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण कानूनों और राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ेगी।
प्रस्तावित योजना में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य प्रजातियों को लेने की संभावना भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदान-प्रदान से विभिन्न राज्यों के जंगलों में जैव विविधता को मजबूती मिल सकती है और पारिस्थितिकी तंत्र अधिक संतुलित हो सकता है।
हालांकि अभी यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय दोनों राज्यों के वन विभागों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल इस पहल को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सभी की नजर इस बात पर है कि यह प्रस्ताव आगे किस रूप में आकार लेता है और क्या वास्तव में राज्यों के बीच वन्यजीवों का यह आदान-प्रदान संभव हो पाता है।

