रतलाम में कम बारिश का असर: धोलावाड़ डेम सिर्फ 45% भरा, गेहूं की सिंचाई के लिए पानी देने पर रोक
रतलाम जिले में इस बार कम बारिश का असर जलस्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है। जिले की पेयजल जरूरतों का प्रमुख आधार धोलावाड़ डेम भी पर्याप्त नहीं भर पाया है। अब तक डेम में करीब 45 प्रतिशत ही पानी जमा हो सका है। ऐसे में गर्मी के दिनों में पेयजल संकट की स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अभी से पानी को सुरक्षित रखने की कवायद शुरू कर दी है।
गेहूं की सिंचाई के लिए डेम से पानी देने पर रोक
पानी की उपलब्धता को देखते हुए कलेक्टर अजय कटेसरिया ने धोलावाड़ डेम से गेहूं की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। प्रशासन का उद्देश्य डेम में मौजूद पानी को मुख्य रूप से पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखना है।
अधिकारियों के अनुसार, कम बारिश के कारण इस बार डेम में अपेक्षाकृत कम पानी आया है। यदि सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है तो आने वाले महीनों में पेयजल व्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है।
गर्मी में पेयजल के लिए पानी सुरक्षित रखना जरूरी
धोलावाड़ डेम रतलाम जिले के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। शहर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों के लिए भी इस जलाशय पर निर्भरता रहती है। वर्तमान में जलस्तर अपेक्षाकृत कम होने के कारण प्रशासन गर्मी तक पानी सुरक्षित रखने की योजना पर काम कर रहा है।
कम बारिश की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में पानी के उपयोग को लेकर प्रशासन की ओर से अन्य जरूरी कदम भी उठाए जा सकते हैं। फिलहाल गेहूं की सिंचाई के लिए डेम का पानी नहीं देने का फैसला जलसंकट की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से भी पानी का जरूरत के अनुसार उपयोग करने और अनावश्यक पानी बर्बाद नहीं करने की अपील की है।

