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लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को मिला कारोबार का सहारा, मध्यप्रदेश में 44% से बढ़कर 61% हुआ आंकड़ा

लाड़ली बहना योजना से महिलाओं को मिला कारोबार का सहारा, मध्यप्रदेश में 44% से बढ़कर 61% हुआ आंकड़ा

मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना योजना का असर अब महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भी दिखाई देने लगा है। योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने महिलाओं को छोटे कारोबार और स्वरोजगार से जुड़ने में मदद की है। योजना शुरू होने से पहले प्रदेश में 44 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी तरह के कारोबार से जुड़ी थीं, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर 61 प्रतिशत हो गया है। यानी कारोबार करने वाली महिलाओं के अनुपात में 17 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यह दावा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के सेंटर फॉर इकोनॉमी, ट्रेड एंड इनोवेशन की ओर से किए गए सर्वे में किया गया है। सर्वे के निष्कर्षों के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने का अवसर दिया है।

44 प्रतिशत से बढ़कर 61 प्रतिशत हुआ आंकड़ा

सर्वे के अनुसार, लाड़ली बहना योजना शुरू होने से पहले मध्यप्रदेश में 44 प्रतिशत महिलाएं कारोबार से जुड़ी हुई थीं। योजना लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 61 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस तरह महिलाओं के कारोबार से जुड़ने के अनुपात में 17 प्रतिशत अंक का इजाफा हुआ है।

इस बदलाव को महिलाओं की आर्थिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं को अपनी छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में पैसा लगाने का अवसर मिला है।

छोटे कारोबार शुरू करने में मिली मदद

लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता भेजी जाती है। इस राशि का इस्तेमाल महिलाएं अपनी घरेलू जरूरतों के साथ-साथ छोटे कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में भी कर सकती हैं।

कई महिलाएं सीमित पूंजी के साथ छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने की कोशिश करती हैं। ऐसे में नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए शुरुआती पूंजी या कारोबार में अतिरिक्त पैसा लगाने का माध्यम बन सकती है। इससे महिलाओं को अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुसार फैसले लेने में भी मदद मिलती है।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर सर्वे में जोर

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के सेंटर फॉर इकोनॉमी, ट्रेड एंड इनोवेशन के सर्वे में महिलाओं के कारोबार से जुड़ने के आंकड़ों को प्रमुखता से सामने रखा गया है। सर्वे के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ी है।

यह बदलाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की चर्चा को महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, कारोबार से जुड़ने के आंकड़ों में बढ़ोतरी के पीछे योजना के अलावा अन्य सामाजिक और आर्थिक कारकों की भूमिका का आकलन भी जरूरी है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम

लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि महिलाओं को अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराती है। सर्वे में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कारोबार से जुड़ी महिलाओं का अनुपात बढ़ा है।

अब इस बात पर भी नजर रहेगी कि महिलाएं छोटे कारोबार से आगे बढ़कर किस तरह अपने व्यवसाय का विस्तार करती हैं और उन्हें बाजार, प्रशिक्षण तथा अतिरिक्त वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं कितनी मिल पाती हैं।

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