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पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण, सांसद बने केवट; छोटी बाजार में राम वनगमन और गंगा पार कराने का भावपूर्ण मंचन

पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण, सांसद बने केवट; छोटी बाजार में राम वनगमन और गंगा पार कराने का भावपूर्ण मंचन

छोटी बाजार में आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम के वनगमन, केवट द्वारा गंगा पार कराने और राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण दृश्यों को जीवंत कर दिया। इस दौरान सांसद ने केवट की भूमिका निभाई, जो रामलीला का प्रमुख आकर्षण रही। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के वन जाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया, वहीं केवट और श्रीराम के संवाद ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

रामलीला देखने के लिए स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक प्रेम, त्याग और समर्पण का संदेश दिया।

राम वनगमन के प्रसंग ने किया भावुक

रामलीला में भगवान श्रीराम के वनगमन का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पिता के वचन का सम्मान करते हुए श्रीराम ने राजमहल की सुख-सुविधाओं को छोड़कर वन जाने का निर्णय लिया। माता सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हुए।

इस दृश्य में कलाकारों ने श्रीराम के त्याग और मर्यादा को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। वनगमन के दौरान परिवार से बिछड़ने की पीड़ा और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को देखकर दर्शक भावुक नजर आए। रामायण का यह प्रसंग कठिन परिस्थितियों में भी अपने वचन और कर्तव्य का पालन करने की सीख देता है।

सांसद ने निभाई केवट की भूमिका

कार्यक्रम में केवट का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सांसद ने केवट की भूमिका निभाई। मंचन में केवट भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने के लिए सामने आते हैं। इस दौरान केवट और भगवान श्रीराम के बीच संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया।

केवट का प्रसंग भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह दृश्य बताता है कि सच्ची भक्ति में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्व श्रद्धा और समर्पण का होता है। केवट की भूमिका में सांसद को देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता रही।

पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण

रामलीला में राजा दशरथ के अंतिम समय का भी मार्मिक मंचन किया गया। भगवान श्रीराम के वन जाने के बाद राजा दशरथ पुत्र वियोग की पीड़ा सहन नहीं कर पाए। श्रीराम के प्रति गहरे प्रेम और उनके वियोग से व्यथित राजा दशरथ ने अंततः प्राण त्याग दिए।

इस प्रसंग में कलाकारों ने राजा दशरथ की भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया और माता-पिता तथा संतान के बीच प्रेम के महत्व को सामने रखा।

रामलीला में दिखी धार्मिक आस्था

छोटी बाजार में हुए इस आयोजन के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। वनगमन से कर्तव्य और मर्यादा, केवट प्रसंग से भक्ति और समर्पण तथा राजा दशरथ के प्रसंग से पारिवारिक प्रेम का संदेश मिला।

रामलीला भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को रामायण की कथाओं और उनसे मिलने वाली सीख से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। छोटी बाजार में हुए भावपूर्ण मंचन ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर दिया।

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