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खंडवा: चंद्रग्रहण के दौरान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरों के पट होंगे बंद

खंडवा: चंद्रग्रहण के दौरान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरों के पट होंगे बंद

खंडवा में 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते धार्मिक स्थल और ज्योतिर्लिंग मंदिरों में विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं। खंडवा स्थित ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरों के पट इस दिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक बंद रहेंगे।

मंदिर समिति ने बताया कि ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की परंपरागत शुद्धि प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों का सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके पश्चात, रात 8 बजे से श्रद्धालु पुनः दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नया समय-चक्र भी जारी किया है, जिसमें ग्रहण के दौरान और बाद में आने वाले भक्तों के लिए स्पष्ट समय निर्धारित किया गया है। समिति के अनुसार, यह कदम मंदिरों में व्यवस्था और भक्तों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन करने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि ग्रहण के दौरान मंदिर बंद रहना परंपरा और धार्मिक नियमों के अनुसार आवश्यक है। इसका उद्देश्य धार्मिक अनुशासन बनाए रखना और शुद्धिकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ज्योतिर्लिंग जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल में ग्रहण के समय दर्शन न होने से श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ता। बल्कि यह पवित्रता और धार्मिक विश्वास को बनाए रखने का एक तरीका है।

खंडवा और आसपास के क्षेत्रों के लोग इस अवसर पर मंदिरों में दर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। मंदिर समिति ने सुनिश्चित किया है कि सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन का अवसर मिले और किसी प्रकार की भीड़-भाड़ से बचा जा सके।

मंदिरों में ग्रहण काल के दौरान बंद रहने का यह प्रबंध न केवल धार्मिक परंपरा का पालन करता है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता देता है। समिति ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित समय का पालन करें और शांति के साथ पूजा-अर्चना करें।

इस प्रकार, 3 मार्च के चंद्रग्रहण के दौरान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरों में विशेष बंदी और शुद्धिकरण के बाद दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। श्रद्धालु रात 8 बजे से मंदिरों में पुनः दर्शन और पूजा कर सकेंगे, जिससे उनकी आस्था और धार्मिक अनुभव पूर्ण और सुरक्षित बना रहेगा।

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