Samachar Nama
×

जेयू का फीस बम: 15 सेवाओं की फीस 376% तक बढ़ाई, नियमों में 5% की ही बढ़ोतरी तय

जेयू का फीस बम: 15 सेवाओं की फीस 376% तक बढ़ाई, नियमों में 5% की ही बढ़ोतरी तय

जेयू यानी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों और अन्य आवेदकों को मिलने वाली विभिन्न सेवाओं की फीस में भारी बढ़ोतरी का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय ने करीब 15 सेवाओं की फीस में 376 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि निर्धारित नियमों के मुताबिक फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की जानी थी। फीस में अचानक हुई इस बड़ी वृद्धि से विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।

विश्वविद्यालय की ओर से अलग-अलग सेवाओं के लिए ली जाने वाली फीस में संशोधन किया गया है। इनमें प्रमाण-पत्र, दस्तावेजों से जुड़ी सेवाएं और अन्य प्रशासनिक कार्यों की फीस शामिल बताई जा रही है। कुछ सेवाओं में मामूली वृद्धि की गई है, लेकिन कई मामलों में फीस कई गुना बढ़ गई है।

5 प्रतिशत की जगह 376 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

फीस बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां नियमों के तहत केवल 5 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने की बात थी, वहीं कुछ सेवाओं की फीस में 376 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गई। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की फीस निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई पहले ही महंगी हो रही है। ऐसे में प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी सेवाओं के शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी से छात्रों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए इसका असर ज्यादा हो सकता है।

15 सेवाओं के शुल्क में बदलाव

विश्वविद्यालय की ओर से कुल 15 सेवाओं की फीस में बदलाव किया गया है। इनमें अलग-अलग प्रशासनिक और शैक्षणिक सेवाएं शामिल हैं। कुछ सेवाओं के शुल्क में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ में फीस कई गुना बढ़ा दी गई है।

विद्यार्थियों का कहना है कि फीस बढ़ाने से पहले विश्वविद्यालय को इसका आधार स्पष्ट करना चाहिए था। यदि किसी सेवा को उपलब्ध कराने की लागत बढ़ी है तो उसका विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को पता चल सके कि फीस में इतनी बड़ी वृद्धि क्यों की गई।

छात्रों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कई मौकों पर प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होने से इन सेवाओं के लिए छात्रों को पहले की तुलना में काफी अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी।

छात्र संगठनों की ओर से भी इस फैसले पर सवाल उठाए जाने की संभावना है। उनका कहना है कि फीस में बदलाव पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और तय नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

नियमों के पालन पर उठे सवाल

सबसे अहम मुद्दा यह है कि जब फीस बढ़ोतरी की सीमा 5 प्रतिशत निर्धारित थी तो कुछ सेवाओं के शुल्क में 376 प्रतिशत तक वृद्धि कैसे की गई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में स्पष्टीकरण की मांग उठ सकती है।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय को फीस वृद्धि की समीक्षा करनी चाहिए और नियमों के अनुरूप ही शुल्क तय करना चाहिए। यदि बढ़ी हुई फीस को वापस नहीं लिया गया तो छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक भार बढ़ सकता है।

फिलहाल जेयू की 15 सेवाओं की फीस में हुई इस बड़ी बढ़ोतरी ने विश्वविद्यालय की फीस नीति को लेकर बहस छेड़ दी है। अब निगाह इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या बढ़ी हुई फीस की समीक्षा की जाती है।

Share this story

Tags