फर्जी डिग्री पर नौकरी, 51 शिक्षकों पर होगी FIR: 20 साल में 100 करोड़ से ज्यादा वेतन लेने का आरोप, शिवराज सरकार के दौरान हुई थी भर्ती
मध्यप्रदेश में फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले 51 शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी है। आरोप है कि इन शिक्षकों ने करीब 20 साल तक सरकारी सेवा में रहते हुए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का वेतन प्राप्त किया।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय जांच में दस्तावेजों और डिग्रियों की वैधता को लेकर सवाल उठे हैं। अब संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुई थी भर्ती
बताया जा रहा है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति करीब दो दशक पहले हुई थी। उस समय मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार के कार्यकाल के दौरान भर्ती प्रक्रिया हुई थी। नियुक्ति के बाद संबंधित शिक्षक अलग-अलग सरकारी स्कूलों में सेवाएं देते रहे।
जांच के दौरान उनके शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरे मामले की दोबारा जांच शुरू हुई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था और फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने में किस-किस की भूमिका रही।
20 साल में 100 करोड़ से ज्यादा वेतन का दावा
मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी खजाने से दिए गए वेतन को लेकर है। आरोप है कि 51 शिक्षकों ने करीब 20 वर्षों तक नौकरी करते हुए 100 करोड़ रुपए से अधिक वेतन प्राप्त किया। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो सरकार के सामने गलत तरीके से प्राप्त वेतन की वसूली का भी सवाल खड़ा हो सकता है।
हालांकि, वेतन की कुल राशि और उसकी वसूली से संबंधित अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
FIR के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
शिक्षा विभाग की ओर से संबंधित शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पुलिस शिकायत के आधार पर दस्तावेजों की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि डिग्री वास्तव में फर्जी थी या नहीं तथा नियुक्ति के दौरान जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी या नहीं।
इसके अलावा फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
फिलहाल 51 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच और FIR के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में कितने लोग जिम्मेदार हैं और सरकार को आर्थिक नुकसान की वास्तविक राशि कितनी हुई है।

