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यूसीसी को लेकर जमीअत का विरोध, मुफ्ती ने कहा- धार्मिक आजादी पर असर डाल रही सरकार

यूसीसी को लेकर जमीअत का विरोध, मुफ्ती ने कहा- धार्मिक आजादी पर असर डाल रही सरकार

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर जमीअत की ओर से विरोध जताया गया है। संगठन से जुड़े मुफ्ती ने यूसीसी को इस्लाम और शरीयत के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों से धार्मिक आजादी सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मुफ्ती ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्म और समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हैं। मुस्लिम समुदाय के लिए निकाह, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े कई मामलों में शरीयत के नियम महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार यूसीसी लागू होने की स्थिति में इन व्यक्तिगत कानूनों पर असर पड़ सकता है।

जमीअत के प्रतिनिधि ने यूसीसी को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि देश के संविधान में सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। उनका कहना है कि किसी भी कानून को लागू करते समय विभिन्न समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नीतियों के कारण धार्मिक आजादी को लेकर मुस्लिम समुदाय में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना था कि कानून बनाते समय संबंधित समुदायों से व्यापक स्तर पर चर्चा और संवाद होना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय को यह महसूस न हो कि उसकी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

यूसीसी समर्थकों का तर्क है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसके समर्थक इसे लैंगिक समानता और समान नागरिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। वहीं विरोध करने वाले पक्षों का कहना है कि अलग-अलग समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक समान कानून के तहत लाने से उनके व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

इसी मुद्दे को लेकर जमीअत की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है। संगठन का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत मामलों में शरीयत के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।

मुफ्ती ने सरकार से अपील की कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी के बजाय सभी समुदायों के प्रतिनिधियों से बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

यूसीसी को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है। ऐसे में जमीअत की आपत्ति के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है। अब सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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