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बारिश में फिर डूबे जयपुर के जलभराव वाले स्पॉट, 35 जगहों पर समस्या; सुधार के दावों पर उठे सवाल

बारिश में फिर डूबे जयपुर के जलभराव वाले स्पॉट, 35 जगहों पर समस्या; सुधार के दावों पर उठे सवाल

जयपुर में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए किए जा रहे इंतजामों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। शहर में पहले से चिन्हित जलभराव वाले 35 स्पॉट में अब 8 नए स्थान और जुड़ गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन 17 स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने का दावा किया गया था, उन्हीं जगहों पर जरा सी बारिश में पानी भर रहा है।

बारिश के बाद शहर की सड़कों पर जलभराव होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह पानी जमा होने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। निचले इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब नजर आ रही है।

सुधार के बाद भी नहीं खत्म हुई समस्या

जलभराव की समस्या वाले स्थानों की पहचान कर नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से कई जगह सुधार कार्य कराए गए थे। अधिकारियों ने इन स्थानों पर जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करने और बारिश का पानी तेजी से निकालने के लिए काम किया।

इसके बावजूद बारिश होते ही उन्हीं स्थानों पर दोबारा पानी जमा होने लगा। इससे किए गए सुधार कार्यों की गुणवत्ता और योजना पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हल्की बारिश में ही सड़कें पानी में डूब रही हैं तो तेज बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।

8 नए स्पॉट बढ़े

शहर में जलभराव की समस्या वाले स्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले चिन्हित 35 स्पॉट के अलावा 8 नए स्थान सामने आए हैं, जहां बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या देखने को मिल रही है।

इन नए स्थानों के सामने आने के बाद प्रशासन के सामने जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की चुनौती और बढ़ गई है। नए स्पॉट की पहचान के साथ अब वहां पानी भरने के कारणों का पता लगाना भी जरूरी होगा।

जरा सी बारिश में सड़कों पर पानी

जयपुर में बारिश के दौरान कई प्रमुख सड़कों और इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को परेशानी होती है। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहनों के बंद होने और ट्रैफिक धीमा पड़ने की स्थिति भी बन जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। केवल बारिश के समय पानी निकालने के इंतजाम करने के बजाय नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाने और पानी के प्राकृतिक बहाव को बनाए रखने पर काम करने की जरूरत है।

अब 8 नए जलभराव वाले स्पॉट सामने आने और पहले से सुधार किए गए 17 स्थानों पर दोबारा पानी भरने के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में तेज बारिश होने पर शहर में जलभराव की स्थिति कितनी गंभीर होती है, यह देखने वाली बात होगी।

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