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मरचुरी में नाबालिग छात्राओं को पोस्टमार्टम दिखाने के मामले में जांच तेज, CWC ने डीन और CMHO से 7 दिन में मांगा जवाब

मरचुरी में नाबालिग छात्राओं को पोस्टमार्टम दिखाने के मामले में जांच तेज, CWC ने डीन और CMHO से 7 दिन में मांगा जवाब

मरचुरी में नाबालिग छात्राओं को पोस्टमार्टम प्रक्रिया दिखाए जाने के मामले में जांच तेज हो गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल कल्याण समिति यानी CWC ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। समिति ने मेडिकल कॉलेज के डीन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर पूरे मामले में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामला सामने आने के बाद छात्राओं की सुरक्षा और उन्हें पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया दिखाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। नाबालिग छात्राओं को ऐसी जगह ले जाने और वहां की प्रक्रिया दिखाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसे लेकर भी जांच की जा रही है। CWC ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक जानकारी मांगी है।

इधर स्कूल प्रबंधन ने भी दोनों छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं। छात्राओं से यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें किस परिस्थिति में मरचुरी ले जाया गया और वहां क्या-क्या दिखाया गया। उनके बयान मामले की जांच में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

CWC की ओर से डीन और CMHO से सात दिन में जवाब मांगे जाने के बाद अब संबंधित विभागों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें छात्राओं को मरचुरी ले जाने का उद्देश्य, अनुमति देने वाले अधिकारी और वहां मौजूद व्यवस्था सहित अन्य बिंदुओं पर जवाब मांगा जा सकता है।

मामले में यह भी जांच का विषय है कि नाबालिग छात्राओं को पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया दिखाने से पहले उनकी उम्र और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं या नहीं। बाल संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत बच्चों के हित और गरिमा को प्राथमिकता देना जरूरी माना जाता है।

स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्राओं के बयान दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। CWC की रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

फिलहाल पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और बाल कल्याण समिति की भूमिका जांच के दायरे में है। सात दिन में मांगे गए जवाब के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। प्रशासनिक स्तर पर भी यह देखा जा रहा है कि छात्राओं को मरचुरी तक ले जाने और पोस्टमार्टम प्रक्रिया दिखाने के पीछे क्या उद्देश्य था और इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

मामले ने नाबालिग बच्चों को संवेदनशील चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से परिचित कराने के तरीके और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब CWC की जांच और अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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