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रीवा मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी, ‘वन स्टाइपेंड’ नीति और बढ़ी राशि की मांग

रीवा मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी, ‘वन स्टाइपेंड’ नीति और बढ़ी राशि की मांग

श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (एसएसएम) रीवा में इंटर्न डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इंटर्न डॉक्टर प्रदेश में ‘वन स्टाइपेंड’ नीति लागू करने और स्टाइपेंड राशि बढ़ाने की मांग को लेकर कॉलेज परिसर में आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को भी बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर कॉलेज परिसर में एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को मिलने वाले स्टाइपेंड में असमानता है। उनका कहना है कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समान नीति लागू होनी चाहिए, ताकि हर इंटर्न डॉक्टर को एक समान आर्थिक लाभ मिल सके।

इंटर्न डॉक्टरों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द ‘वन स्टाइपेंड’ व्यवस्था लागू करे और वर्तमान स्टाइपेंड राशि में भी बढ़ोतरी की जाए। डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल से लेकर आपातकालीन सेवाओं तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय पर्याप्त नहीं है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों और सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

कॉलेज परिसर में प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को लेकर कॉलेज प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, अभी तक प्रदर्शन को लेकर किसी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में इंटर्न डॉक्टर अस्पताल व्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों में असंतोष देखने को मिल रहा है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर कब तक निर्णय लिया जाता है।

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