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7 साल बाद भी अधूरी इंदौर-दाहोद रेल टनल: 3 किमी की सुरंग बनी बड़ी बाधा, धार तक ट्रेन संचालन अटका

7 साल बाद भी अधूरी इंदौर-दाहोद रेल टनल: 3 किमी की सुरंग बनी बड़ी बाधा, धार तक ट्रेन संचालन अटका

इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना का सबसे अहम हिस्सा मानी जा रही टीही के आगे बन रही करीब तीन किलोमीटर लंबी रेलवे टनल सात साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के कारण इंदौर से धार तक ट्रेन संचालन शुरू नहीं हो पाया, जिससे पूरी परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है।

यह इंदौर से जुड़े किसी भी रेलवे प्रोजेक्ट की पहली रेलवे टनल है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि देश के कई अन्य रेल प्रोजेक्ट्स में इससे कहीं अधिक लंबी सुरंगें कम समय में तैयार कर ली गईं, जबकि यह परियोजना अब भी अधूरी है।

टनल निर्माण में देरी से अटका रेल संचालन

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, टीही के पास बन रही यह सुरंग इंदौर-दाहोद रेल लाइन का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। जब तक इसका निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक धार तक ट्रेनों का संचालन शुरू करना संभव नहीं है।

परियोजना की धीमी प्रगति का असर न केवल रेल यातायात पर पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की गति भी प्रभावित हो रही है।

पहली रेलवे टनल, लेकिन समय सीमा से काफी पीछे

इंदौर रेल मंडल के इतिहास में यह पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें रेलवे टनल का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना शुरू होने के समय इसे तय अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और अन्य कारणों से काम लगातार पीछे खिसकता गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई राज्यों में इससे कहीं लंबी रेलवे सुरंगों का निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जा चुका है, जिससे इस परियोजना में हुई देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

धार और आसपास के क्षेत्रों को इंतजार

इंदौर-दाहोद रेल लाइन पूरी होने के बाद धार सहित आसपास के जिलों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

हालांकि, टनल अधूरी रहने के कारण स्थानीय लोगों को अभी इस सुविधा का इंतजार करना पड़ रहा है।

परियोजना पूरी होने पर मिलेगा बड़ा लाभ

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि टनल निर्माण पूरा होने के बाद इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना को गति मिलेगी और धार तक ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकेगा। इससे मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा तथा क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि वर्षों से लंबित टनल निर्माण कब पूरा होगा और इंदौर से धार तक ट्रेन चलने का सपना आखिरकार कब साकार होगा।

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