भोपाल में देश की पहली ‘एल्गी ट्री’ तकनीक की शुरुआत, प्रदूषण नियंत्रण में नया प्रयोग
मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल की शुरुआत की गई है। शहर के अशोका गार्डन स्थित Vivekanand Park में देश की पहली ‘एल्गी ट्री’ तकनीक स्थापित की गई है, जिसे वायु प्रदूषण कम करने और कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण के लिए एक आधुनिक प्राकृतिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
यह प्रणाली माइक्रोएल्गी (सूक्ष्म शैवाल) आधारित तकनीक पर काम करती है, जिसमें विशेष प्रकार के जल और प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से शैवाल को विकसित किया जाता है। ये शैवाल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों को अवशोषित करके ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। इसे पारंपरिक पेड़ों का एक वैज्ञानिक विकल्प या पूरक तकनीक माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को पर्यावरण तकनीक से जुड़ी संस्था Mushroom World के सहयोग से विकसित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक प्रभावी और कम जगह में काम करने वाला समाधान तैयार करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘एल्गी ट्री’ सामान्य पेड़ों की तुलना में कम स्थान में अधिक तेजी से कार्बन अवशोषण की क्षमता रखता है। इसके साथ ही यह सिस्टम धूल कणों और अन्य प्रदूषकों को भी कम करने में सहायक हो सकता है। खास बात यह है कि इसे शहरी पार्कों, सड़कों के किनारे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह पहल भोपाल को हरित और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है और इसके परिणामों का अध्ययन किया जाएगा। यदि यह सफल रहता है, तो इसे शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस तकनीक को “नवाचार आधारित ग्रीन सॉल्यूशन” बताया है, जो पारंपरिक वृक्षारोपण के साथ मिलकर वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इसे प्राकृतिक पेड़ों का विकल्प नहीं बल्कि पूरक तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों में भी इस नई पहल को लेकर उत्सुकता देखने को मिल रही है। पार्क में लगाए गए इस सिस्टम को देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं और इसके काम करने के तरीके को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक की निगरानी की जाएगी और इसके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर ही इसे बड़े पैमाने पर लागू करने का निर्णय लिया जाएगा।
कुल मिलाकर, Bhopal में शुरू की गई यह ‘एल्गी ट्री’ तकनीक शहरी पर्यावरण सुधार की दिशा में एक नवाचारपूर्ण प्रयोग के रूप में देखी जा रही है, जो भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण की नई राह खोल सकती है।

