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उमरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के 195 घर पांच साल से अधूरे, 2281 आवास हुए थे स्वीकृत

उमरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना के 195 घर पांच साल से अधूरे, 2281 आवास हुए थे स्वीकृत

उमरिया जिले के चंदिया नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों के निर्माण की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। नगर परिषद के 15 वार्डों में वर्ष 2020 और 2021 के दौरान स्वीकृत किए गए 2281 आवासों में से 195 मकान ऐसे हैं, जो करीब पांच साल बाद भी अधूरे पड़े हैं। लंबे समय से निर्माण पूरा नहीं होने के कारण पात्र हितग्राही अपने पक्के घर का इंतजार कर रहे हैं।

2020 और 2021 में स्वीकृत हुए थे 2281 आवास

जानकारी के अनुसार चंदिया नगर परिषद क्षेत्र के 15 वार्डों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2020 और 2021 में कुल 2281 आवास स्वीकृत किए गए थे। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है।

स्वीकृति मिलने के बाद हितग्राहियों को निर्माण की अलग-अलग अवस्थाओं के आधार पर राशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके बावजूद कई आवासों का निर्माण निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया। अब 195 आवास ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनका काम लंबे समय से अधूरा है।

पांच साल से अधूरे पड़े हैं मकान

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन आवासों को करीब पांच साल पहले स्वीकृति मिली थी, उनका निर्माण अब तक पूरा क्यों नहीं हो सका। अधूरे मकानों के कारण कई हितग्राही पुराने या अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर हैं।

योजना के तहत मकान का निर्माण पूरा होने पर हितग्राही को सुरक्षित और पक्का आवास मिलना था। लेकिन निर्माण की धीमी गति के कारण योजना का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहा है।

कई आवासों का काम अब भी बाकी

2281 स्वीकृत आवासों में से कई का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन 195 आवासों का काम अभी भी अधूरा बताया जा रहा है। कुछ मकानों में नींव और दीवारों का काम होने के बाद निर्माण आगे नहीं बढ़ा, जबकि कुछ में छत और अन्य काम बाकी हैं।

निर्माण कार्य अधूरा रहने के पीछे हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और योजना की राशि से जुड़े कारण हो सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में नगर परिषद स्तर पर सभी अधूरे आवासों की समीक्षा जरूरी है।

जिम्मेदारों की निगरानी पर भी सवाल

पांच साल से अधूरे आवासों ने योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी हितग्राही ने निर्माण शुरू करने के बाद काम रोक दिया था तो नगर परिषद को समय रहते उसकी स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए थी। वहीं राशि जारी होने के बावजूद निर्माण नहीं हुआ है तो संबंधित स्तर पर इसकी जांच की जरूरत है।

अब जरूरत है कि नगर परिषद अधूरे पड़े सभी 195 आवासों की वार्डवार समीक्षा करे। हितग्राहियों की समस्याओं की पहचान कर निर्माण पूरा कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

हितग्राहियों को है पक्के घर का इंतजार

प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में वर्षों से अधूरे पड़े मकान योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं। चंदिया नगर परिषद क्षेत्र के हितग्राहियों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए अधूरे आवासों का निर्माण जल्द पूरा कराएगा।

अब देखना होगा कि नगर परिषद और जिला प्रशासन इन 195 अधूरे आवासों को पूरा कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं और पात्र परिवारों को उनका पक्का घर कब तक मिल पाता है।

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