आदिवासियों और गरीबों की जमीन के मामलों में श्योपुर प्रशासन के आंकड़े गलत, 449 की जगह 697 प्रकरण मिले; हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद हुआ सत्यापन
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में आदिवासियों और गरीबों की जमीन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक आंकड़ों की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जमीन से संबंधित प्रकरणों की संख्या को लेकर जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में काफी अंतर मिला है। पहले कलेक्टर ने हाईकोर्ट को 440 प्रकरणों की जानकारी दी थी, जबकि सही संख्या 449 होनी चाहिए थी। इसके बाद हाईकोर्ट की नाराजगी के चलते जब मैदानी स्तर पर सत्यापन कराया गया तो कुल 697 प्रकरण सामने आए। इस खुलासे के बाद प्रशासन की ओर से तैयार किए गए आंकड़ों और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, श्योपुर जिले में आदिवासियों और गरीब परिवारों की जमीन से जुड़े मामलों की सुनवाई और कार्रवाई को लेकर न्यायिक स्तर पर मामला पहुंचा था। इन प्रकरणों की संख्या और उनकी स्थिति के संबंध में जिला प्रशासन से जानकारी मांगी गई थी। प्रशासन की ओर से पहले 440 मामलों का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, बाद में सामने आया कि यह संख्या भी सही नहीं थी।
हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद कराया गया सत्यापन
मामले में प्रशासन की ओर से पेश किए गए आंकड़ों में अंतर सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद प्रकरणों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मैदानी स्तर पर सत्यापन कराने की जरूरत पड़ी। जब संबंधित रिकॉर्ड और मामलों की जांच की गई तो पहले बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक प्रकरण सामने आए।
मैदानी सत्यापन में कुल 697 मामले मिले। इस तरह प्रशासन की ओर से पहले बताए गए 440 मामलों के मुकाबले 257 अतिरिक्त प्रकरण सामने आए। वहीं, पहले बताए गए आंकड़े में वास्तविक 449 प्रकरणों की तुलना में भी नौ मामलों की कमी थी।
गरीबों और आदिवासियों की जमीन से जुड़े हैं मामले
ये सभी प्रकरण आदिवासियों और गरीब वर्ग के लोगों की जमीन से संबंधित हैं। ऐसे मामलों में जमीन के अधिकार, कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। प्रभावित परिवारों के लिए जमीन आजीविका और आर्थिक सुरक्षा का प्रमुख आधार होती है। इसलिए इन मामलों का सही रिकॉर्ड तैयार करना और समय पर कार्रवाई करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रकरणों की वास्तविक संख्या सामने आने के बाद अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर पहले तैयार किए गए आंकड़ों में इतनी बड़ी विसंगति कैसे रह गई। क्या सभी संबंधित मामलों को रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया था या फिर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया में लापरवाही हुई थी, यह जांच का विषय है।
प्रशासनिक रिकॉर्ड पर उठे सवाल
श्योपुर प्रशासन के आंकड़ों और मैदानी सत्यापन में सामने आए मामलों की संख्या के बीच अंतर ने सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। खासकर तब, जब मामला गरीबों और आदिवासियों की जमीन से जुड़े अधिकारों का हो और इसकी जानकारी हाईकोर्ट के सामने प्रस्तुत की गई हो।
फिलहाल मैदानी सत्यापन में सामने आए 697 प्रकरण इस मामले का महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। अब इन सभी मामलों की वास्तविक स्थिति और उनके निस्तारण को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

