मप्र में स्कूल मर्जर का असर, लाखों बच्चों की पढ़ाई पर संकट; नवाचारों के दावों के बीच उठे सवाल
मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों में नवाचारों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। हालांकि, दूसरी ओर स्कूलों के मर्जर और कम नामांकन वाले स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने के फैसले ने नई चिंता खड़ी कर दी है। इन फैसलों का सीधा असर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ने की आशंका है।
बताया जा रहा है कि कम छात्र संख्या वाले सरकारी स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने की प्रक्रिया के चलते कई बच्चों को अब पहले की तुलना में अधिक दूरी तय करके स्कूल जाना पड़ सकता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जिन गांवों और क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां अभिभावकों की परेशानी और बढ़ सकती है।
स्कूल मर्जर का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ने की संभावना है, जो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में यदि नजदीकी सरकारी स्कूल बंद या मर्ज हो जाता है तो बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में अभिभावक बच्चों को दूर स्थित स्कूल भेजने में असमर्थ हो सकते हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई छूटने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

