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सड़क नहीं तो हेलीकॉप्टर दे दीजिए! सुकमा के ग्रामीणों की अमित शाह से अनोखी मांग, मेडिकल इमरजेंसी का बताया संकट

सड़क नहीं तो हेलीकॉप्टर दे दीजिए! सुकमा के ग्रामीणों की अमित शाह से अनोखी मांग, मेडिकल इमरजेंसी का बताया संकट

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक गांव के लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से हेलीकॉप्टर की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनके गांव तक सड़क नहीं बनाई जा सकती, तो कम से कम मेडिकल इमरजेंसी के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने अपनी मांग के पीछे वर्षों से चली आ रही बुनियादी सुविधाओं की कमी को वजह बताया है। उनका कहना है कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।

मेडिकल इमरजेंसी में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार गंभीर रूप से बीमार लोगों को खाट या अस्थायी स्ट्रेचर पर कई किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों की जान पर भी बन आती है। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि यदि सड़क निर्माण में अभी और समय लगना है तो हेलीकॉप्टर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की समस्या उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होता।

विकास कार्यों को लेकर जताई नाराजगी

गांव के लोगों ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी उनका क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। सड़क, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करने के लिए यह अनोखी मांग उठाई है।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना मामला

ग्रामीणों की यह मांग अब चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह मांग भले ही असामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे ग्रामीणों की वास्तविक परेशानियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी छिपी हुई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर

फिलहाल इस मांग को लेकर प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी और क्षेत्र में सड़क तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सुकमा के इस गांव की कहानी देश के उन दूरदराज इलाकों की हकीकत भी बयां करती है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं लोगों की पहुंच से दूर हैं। ग्रामीणों की हेलीकॉप्टर वाली मांग भले ही अनोखी हो, लेकिन इसके पीछे छिपी समस्याएं बेहद गंभीर हैं।

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