गोटमार मेले की पत्थरबाजी में पति की मौत: 20 साल बाद भी नहीं भुला दर्द, बोलीं- परिवार बिखर गया, मजदूरी करनी पड़ी
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध गोटमार मेला जहां वर्षों पुरानी परंपरा के लिए जाना जाता है, वहीं इससे जुड़े हादसों का दर्द भी कई परिवारों ने झेला है। करीब 20 साल पहले इसी मेले के दौरान हुई पत्थरबाजी में एक महिला के पति की मौत हो गई थी। आज भी वह घटना उसके जीवन का सबसे बड़ा दुख बनी हुई है।महिला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “20 साल पहले गोटमार मेले की पत्थरबाजी में पति की जान चली गई थी। उनके जाने के बाद परिवार बिखर गया। बेटे की पढ़ाई छूट गई। मुझे मजदूरी करनी पड़ी।”
एक हादसे ने बदल दी परिवार की जिंदगी
महिला के अनुसार, पति की मौत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। परिवार चलाने के लिए उसे मजदूरी का सहारा लेना पड़ा।आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बेटे की पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई। जिस परिवार ने भविष्य के सपने देखे थे, वह अचानक संघर्षों में घिर गया।
गोटमार मेले में होती है पत्थरबाजी की परंपरा
गोटमार मेला छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा क्षेत्र में आयोजित होने वाला पारंपरिक आयोजन है। इसमें दो पक्षों के लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाने की परंपरा निभाते हैं।हालांकि प्रशासन हर साल सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम करता है, लेकिन कई बार इस दौरान लोग घायल होते हैं और अतीत में मौतों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
प्रशासन करता है सुरक्षा इंतजाम
मेले के दौरान पुलिस बल तैनात किया जाता है और लोगों को नियंत्रित करने के प्रयास किए जाते हैं। इसके बावजूद पत्थरबाजी की परंपरा को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।स्थानीय लोग इसे वर्षों पुरानी आस्था और परंपरा से जोड़ते हैं, जबकि कई लोग इसमें होने वाले नुकसान को देखते हुए बदलाव की मांग करते हैं।
पुराने जख्म आज भी ताजा
पति की मौत के दो दशक बाद भी महिला के लिए वह घटना भुला पाना आसान नहीं है। परिवार की जिम्मेदारियों और संघर्षों के बीच वह आज भी उस दिन को याद कर भावुक हो जाती है।उसकी कहानी गोटमार मेले से जुड़े उन परिवारों की पीड़ा को सामने लाती है, जिन्होंने इस परंपरा की वजह से अपनों को खोया है।

