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MP में कूनो से आई खुशखबरी, भारत में जन्मी KGP-12 बनी मां, चार शावकों को दिया जन्म
 

MP में कूनो से आई खुशखबरी, भारत में जन्मी KGP-12 बनी मां, चार शावकों को दिया जन्म

भारत में कभी खुले जंगलों और घास के मैदानों में दौड़ने वाला चीता 20वीं सदी के मध्य तक देश से पूरी तरह गायब हो चुका था। साल 1952 में भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से चीते को देश में विलुप्त घोषित किया। इसके बाद करीब सात दशक तक भारत की धरती पर जंगली चीते की मौजूदगी नहीं रही। हालांकि, इस प्रजाति को दोबारा भारत में बसाने की कोशिशें लंबे समय से चर्चा में थीं। आखिरकार साल 2022 में इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।

17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को विशेष बाड़ों में छोड़ा। यह दिन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में महत्वपूर्ण माना गया। नामीबिया से लाए गए इन चीतों के भारत पहुंचने के साथ ही देश में चीता पुनर्वास परियोजना का औपचारिक चरण शुरू हुआ।

इन आठ चीतों को विशेष विमान के जरिए भारत लाया गया था। इसके बाद उन्हें कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बनाए गए विशेष क्वारंटीन और निगरानी क्षेत्रों में रखा गया। भारत लाने के बाद चीतों की सेहत, उनके व्यवहार और पर्यावरण के अनुकूल होने की क्षमता पर विशेषज्ञों की टीम लगातार नजर रखती रही।

चीता दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय जानवर माना जाता है। भारत में इसके विलुप्त होने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं, जिनमें शिकार, प्राकृतिक आवास का कम होना और शिकार प्रजातियों की संख्या में कमी प्रमुख हैं। एक समय देश के कई हिस्सों में चीते पाए जाते थे, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या घटती चली गई।

भारत में चीता पुनर्वास का उद्देश्य केवल इस प्रजाति को दोबारा बसाना ही नहीं है, बल्कि इसके लिए उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना भी है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान को चीतों के लिए उपयुक्त स्थानों में शामिल किया गया, जहां पर्याप्त खुला क्षेत्र, पानी और शिकार प्रजातियों की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

नामीबिया से आठ चीते लाए जाने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अलग-अलग चरणों में कई चीते भारत पहुंचे। इनके लिए विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई गई और प्रत्येक चीते के स्वास्थ्य, गतिविधियों और अनुकूलन पर नजर रखी गई।

चीता पुनर्वास अभियान के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। भारत में नए वातावरण में चीतों को बसाना, उनके लिए पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना तथा उनकी प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देना एक लंबी प्रक्रिया है। विशेषज्ञ लगातार इनके व्यवहार और स्वास्थ्य का अध्ययन कर रहे हैं।

1952 में जिस प्रजाति को भारत से विलुप्त घोषित किया गया था, उसके करीब 70 साल बाद कूनो में फिर से चीते लाए गए। 17 सितंबर 2022 की यह पहल भारत के वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में एक अहम अध्याय बनी। आने वाले वर्षों में इस परियोजना की सफलता इस बात से तय होगी कि भारत में चीते स्थायी रूप से कितने सफल तरीके से अपनी आबादी बढ़ा पाते हैं और प्राकृतिक वातावरण में उनका संरक्षण किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।

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