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24 करोड़ का बकाया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव की जवाहर कॉटन मिल होगी नीलाम; तारीख तय

24 करोड़ का बकाया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव की जवाहर कॉटन मिल होगी नीलाम; तारीख तय

मध्य प्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव से जुड़ी जवाहर कॉटन मिल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिल पर करीब 24 करोड़ रुपये का बकाया होने के चलते अब इसकी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। संबंधित विभाग की ओर से नीलामी की तारीख तय कर दी गई है। लंबे समय से बकाया राशि की वसूली का मामला चल रहा था, जिसके बाद अब संपत्ति की नीलामी के जरिए राशि वसूलने की तैयारी की जा रही है।

जवाहर कॉटन मिल खंडवा जिले के बुरहानपुर क्षेत्र में स्थित बताई जाती है और यह मिल लंबे समय से चर्चा में रही है। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने के कारण संबंधित एजेंसी ने नीलामी की कार्रवाई शुरू की है। नीलामी से मिलने वाली राशि से बकाया रकम की वसूली की जाएगी।

24 करोड़ रुपये का बकाया

जानकारी के मुताबिक, जवाहर कॉटन मिल पर करीब 24 करोड़ रुपये की देनदारी बताई जा रही है। बकाया राशि की वसूली के लिए पहले भी संबंधित पक्ष को नोटिस और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए भुगतान का अवसर दिया गया। इसके बावजूद राशि का निपटारा नहीं होने पर अब नीलामी की प्रक्रिया तक मामला पहुंच गया है।

अधिकारियों ने संपत्ति की नीलामी के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तारीख निर्धारित की है। अब निर्धारित तारीख को मिल की नीलामी कर बकाया राशि की वसूली का प्रयास किया जाएगा।

नीलामी के लिए तय की गई तारीख

नीलामी को लेकर संबंधित विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संभावित खरीदारों के लिए नीलामी की शर्तें और संपत्ति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इच्छुक बोलीदाता निर्धारित नियमों के तहत नीलामी में हिस्सा ले सकेंगे।

नीलामी की प्रक्रिया में संपत्ति का मूल्यांकन, आरक्षित मूल्य और अन्य कानूनी औपचारिकताएं महत्वपूर्ण होंगी। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।

मिल की संपत्ति पर लंबे समय से विवाद

जवाहर कॉटन मिल से जुड़ा मामला लंबे समय से अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहा है। मिल के संचालन और बकाया राशि को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। अब नीलामी की तारीख तय होने के बाद इस मामले में एक अहम चरण शुरू हो गया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव का नाम इस मिल से जुड़े होने के कारण राजनीतिक स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। हालांकि, नीलामी की कार्रवाई बकाया राशि की वसूली से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

बकाया वसूली पर प्रशासन का फोकस

नीलामी के जरिए प्रशासन का मुख्य उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है। करीब 24 करोड़ रुपये की राशि लंबित होने के कारण संबंधित विभाग अब प्रक्रिया को जल्द पूरा करना चाहता है। नीलामी में यदि संपत्ति के लिए पर्याप्त बोली मिलती है तो उससे प्राप्त रकम को नियमों के अनुसार बकाया राशि की वसूली में इस्तेमाल किया जाएगा।

फिलहाल नीलामी की तय तारीख पर सभी की नजर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नीलामी में कितनी बोली आती है और क्या इससे करीब 24 करोड़ रुपये के बकाये की पूरी या आंशिक वसूली हो पाती है।

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