वीडियो में देखें 78 साल बाद पहली बार घोड़ी पर सजेगी दलित दूल्हे की बारात, लिम्बोदा गांव में शादी को लेकर तनाव, पुलिस से सुरक्षा की मांग
राजगढ़ जिले के लिम्बोदा गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सामाजिक समानता और परंपराओं को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक दलित परिवार ने अपनी बेटी की शादी को खास और ऐतिहासिक बनाने के लिए दूल्हे की घोड़ी चढ़ाकर और डीजे के साथ बारात निकालने का फैसला किया है। लेकिन इस फैसले के बाद गांव में तनाव और विवाद की आशंका के चलते परिवार ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।
पहली बार घोड़ी पर निकलेगी बारात
परिवार का कहना है कि गांव में आज तक अनुसूचित जाति समाज के किसी दूल्हे की बारात घोड़ी पर नहीं निकली है और न ही डीजे के साथ भव्य आयोजन किया गया है। ऐसे में यह शादी उनके लिए केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सम्मान और सामाजिक बराबरी का प्रतीक बन गई है। परिवार ने अपने आवेदन में लिखा है कि देश को आजाद हुए 78 साल हो चुके हैं, लेकिन गांव में आज भी समानता के अधिकार को लेकर पूरी तरह स्थिति सामान्य नहीं है। इसी वजह से उन्होंने इस बार पूरी धूमधाम और सम्मान के साथ शादी करने का निर्णय लिया है।
गांव में तनाव और आशंका
इस फैसले के बाद गांव में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक बदलाव और समानता की दिशा में एक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों के बीच विरोध और तनाव की आशंका भी जताई जा रही है। परिवार का कहना है कि उन्हें डर है कि शादी के दौरान किसी प्रकार का विवाद या अप्रिय घटना हो सकती है, इसलिए उन्होंने पहले ही प्रशासन से सुरक्षा की मांग कर दी है।
पुलिस से 17-18 मई के लिए सुरक्षा की मांग
परिवार ने प्रशासन को आवेदन देकर 17 और 18 मई को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शादी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए पुलिस की मौजूदगी जरूरी है।
सामाजिक समानता पर फिर उठा सवाल
यह मामला एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सामाजिक परंपराओं और जातिगत भेदभाव को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल एक शादी नहीं, बल्कि समाज में बदलाव और समानता की दिशा में प्रतीकात्मक संदेश भी देते हैं।

