20 साल तक कब्ज समझकर चलता रहा इलाज, आखिरकार जांच में सामने आई असली बीमारी; 70 वर्षीय बुजुर्ग को मिली राहत
लंबे समय से कब्ज की समस्या से जूझ रहे 70 वर्षीय एक बुजुर्ग का करीब 20 वर्षों तक इलाज चलता रहा, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। डॉक्टर उन्हें लगातार आईबीएस-सी (IBS-C: इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम विद कॉन्स्टिपेशन) का मरीज मानकर उपचार करते रहे। हालांकि, बाद में विस्तृत जांच में उनकी समस्या की वास्तविक वजह सामने आई, जिसके बाद उपचार की दिशा बदलने से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद जगी।
दो दशक तक खाते रहे कब्ज की दवाइयां
परिजनों के अनुसार, बुजुर्ग पिछले करीब 20 साल से कब्ज की समस्या से परेशान थे। इस दौरान उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया और लंबे समय तक कब्ज की दवाइयों का सेवन किया। बावजूद इसके उनकी परेशानी कम नहीं हुई और लक्षण लगातार बने रहे।
IBS-C मानकर किया जाता रहा इलाज
चिकित्सकों ने शुरुआती जांच और लक्षणों के आधार पर उन्हें आईबीएस-सी (Irritable Bowel Syndrome with Constipation) का मरीज मानकर इलाज शुरू किया। इस बीमारी में मरीज को लंबे समय तक कब्ज, पेट दर्द, गैस और पेट साफ न होने जैसी समस्याएं होती हैं।
लेकिन लगातार इलाज के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने आगे की जांच कराने का निर्णय लिया।
विस्तृत जांच में सामने आई असली वजह
जब मरीज की गहन चिकित्सीय जांच की गई, तब डॉक्टरों को उसकी समस्या की वास्तविक वजह का पता चला। इसके बाद उपचार की रणनीति पूरी तरह बदल दी गई और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार सामान्य दिखने वाले लक्षणों के पीछे कोई दूसरी गंभीर या अलग बीमारी भी हो सकती है। ऐसे मामलों में यदि लंबे समय तक इलाज के बाद भी राहत नहीं मिले तो विस्तृत जांच कराना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों ने दी यह सलाह
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कब्ज, पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्याएं बनी रहें और दवाइयों से भी आराम न मिले, तो केवल लक्षणों के आधार पर इलाज जारी रखने के बजाय आवश्यक जांच करानी चाहिए।
समय पर सही बीमारी की पहचान होने से मरीज को उचित उपचार मिल सकता है और अनावश्यक दवाइयों से भी बचा जा सकता है।
सही समय पर सही जांच है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बनी रहने वाली पाचन संबंधी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह से बीमारी की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीज को बेहतर और प्रभावी उपचार मिल सके।

