चित्रकूट में 26 दिन में दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात, मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर; एमपी-यूपी प्रशासन अलर्ट
चित्रकूट में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और शुक्रवार रात तक नदी खतरे के निशान को पार कर गई। नदी का पानी बढ़ने से रामघाट समेत निचले इलाकों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और निचले क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी है।
इससे पहले अगस्त के अंत में मंदाकिनी ने चित्रकूट में बेहद विकराल रूप दिखाया था। उस दौरान नदी का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया था और रामघाट सहित कई इलाके जलमग्न हो गए थे। अब करीब 26 दिन बाद सितंबर के आखिर में नदी के दोबारा खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
36 घंटे की बारिश से तेजी से बढ़ा जलस्तर
रिपोर्टों के अनुसार, चित्रकूट क्षेत्र में करीब 36 घंटे से बारिश जारी थी। बारिश के कारण मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और नदी का पानी घाटों तथा आसपास के निचले हिस्सों तक पहुंच गया। रामघाट के आसपास दुकानों और रास्तों पर भी पानी आने की सूचना सामने आई है।अगस्त में आई बाढ़ के दौरान मंदाकिनी का पानी रामघाट के मंदिरों, दुकानों और आसपास के घरों तक पहुंच गया था। उस दौरान राहत और बचाव कार्यों में SDRF और NDRF समेत अन्य टीमें लगाई गई थीं।
एमपी-यूपी सीमा पर प्रशासन सतर्क
मंदाकिनी का जलग्रहण क्षेत्र मध्य प्रदेश के हिस्सों से भी जुड़ा है। ऐसे में नदी के बढ़ते जलस्तर का असर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों तरफ के चित्रकूट क्षेत्र में दिखाई देता है। अगस्त की बाढ़ के दौरान भी दोनों राज्यों की एजेंसियों को राहत-बचाव के लिए सक्रिय किया गया था।नदी का पानी बढ़ने के साथ प्रशासन ने निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी जा रही है। राहत और बचाव दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अगस्त की बाढ़ के बाद फिर बढ़ी चिंता
अगस्त के आखिर में आई बाढ़ ने चित्रकूट में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। मंदाकिनी का पानी कई इलाकों में घुस गया था और सड़कें जलमग्न हो गई थीं। बाद में पानी उतरने पर घरों, दुकानों और सड़कों पर जमा मलबे से नुकसान का अंदाजा सामने आया था।अब सितंबर में दोबारा नदी के उफान पर आने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखना है।फिलहाल लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

