एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्र की आत्महत्या, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ. अंबेडकर बॉयज होस्टल में प्रथम वर्ष के एमबीबीएस छात्र अंतरिक्ष (21) की आत्महत्या ने पूरे कॉलेज और चिकित्सा समुदाय में शोक की लहर दौड़ा दी है। घटना के बाद परिजन लंबे समय तक चुप थे, लेकिन अब उन्होंने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कॉलेज और होस्टल प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
मृतक अंतरिक्ष के परिजनों का कहना है कि छात्र को कॉलेज और होस्टल में लगातार बुलिंग और रैगिंग का सामना करना पड़ रहा था। उनकी बहन ने बताया, “अंतरिक्ष ने अक्सर अपने दोस्तों और परिवार को बताया कि उसे लगातार मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। वह इस मानसिक तनाव से बेहद परेशान था।” पिता ने भी आरोप लगाया कि उनके बेटे की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इस पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की।
परिजनों ने आत्महत्या की परिस्थितियों पर भी संदेह जताया है। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत कारणों से नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कॉलेज और होस्टल में हो रही लगातार मानसिक प्रताड़ना का बड़ा हाथ है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि घटना दुखद है और उन्होंने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। कॉलेज प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि परिजन अभी भी आश्वस्त नहीं हैं और चाहते हैं कि जांच में किसी प्रकार की राजनीति या दबाव शामिल न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ आम हैं। रैगिंग और बुलिंग जैसी गतिविधियाँ छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाल सकती हैं, जिससे वे गंभीर मानसिक तनाव में आ जाते हैं। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की मानसिक स्थिति पर नजर रखना और समय-समय पर परामर्श और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
इस मामले ने देशभर में मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और छात्रों पर हो रहे मानसिक दबाव पर बहस को फिर से उभारा है। कई अधिकारकर्मी और सामाजिक संगठन इसे गंभीर चिंता का विषय मान रहे हैं और सरकार और कॉलेज प्रशासन से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं।
परिजन ने कहा कि वे केवल यह चाहते हैं कि न्याय हो और उनके बेटे की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आए। “हम चाहते हैं कि हमारी जांच निष्पक्ष हो और जिम्मेदार लोग सजा पाएं, ताकि भविष्य में किसी और छात्र को ऐसी मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े,” मृतक के पिता ने कहा।

