MP में अघोषित बिजली कटौती से किसान परेशान, एक दर्जन से ज्यादा जिलों में विरोध; गांवों से सियासी गलियारों तक पहुंचा मुद्दा
मध्य प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा अब गांवों से निकलकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। मंदसौर, राजगढ़, सीहोर, बड़वानी, धार, झाबुआ, खंडवा, आगर मालवा, नर्मदापुरम और बुरहानपुर समेत एक दर्जन से ज्यादा जिलों में बिजली आपूर्ति को लेकर किसानों और ग्रामीणों की नाराजगी सामने आ रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान कई इलाकों में बिजली कटौती को लेकर विरोध की खबरें सामने आई हैं। किसानों का कहना है कि अनियमित बिजली आपूर्ति से खेती-किसानी और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
खेतों में सिंचाई को लेकर बढ़ी परेशानी
ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति का सीधा असर सिंचाई पर पड़ता है। किसानों को खेतों में पानी देने के लिए बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में तय समय पर बिजली नहीं मिलने या बार-बार कटौती होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो सकती है।
किसानों की मांग है कि कृषि कार्यों के लिए निर्धारित समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि बिजली कटौती की पूर्व सूचना मिलने से वे सिंचाई और दूसरे कृषि कार्यों की योजना बना सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध और नाराजगी
मंदसौर से लेकर नर्मदापुरम और बुरहानपुर तक बिजली आपूर्ति को लेकर शिकायतों ने ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ाया है। कई जगहों पर किसानों और ग्रामीणों की ओर से विरोध जताए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और अघोषित कटौती पर रोक लगे।
बिजली की समस्या केवल खेती तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, घरेलू कामकाज, छोटे कारोबार और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है।
बिजली कटौती पर सियासत तेज होने के आसार
मुद्दा कई जिलों में सामने आने के बाद अब इस पर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो रही है। बिजली आपूर्ति राज्य सरकार और संबंधित बिजली वितरण कंपनियों के लिए अहम विषय है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकता है, जबकि सरकार और बिजली कंपनियों की ओर से आपूर्ति की स्थिति तथा कटौती के कारणों पर स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि, बिजली कटौती के कारणों, प्रभावित गांवों की संख्या और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन क्षेत्रों में तकनीकी खराबी, रखरखाव या अन्य कारणों से आपूर्ति बाधित हुई।
किसानों को राहत का इंतजार
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए नियमित सप्लाई, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और कटौती की जानकारी समय पर देना जरूरी है। किसानों की मांग है कि उन्हें खेती के लिए निर्धारित समय पर बिजली मिले, ताकि फसलों की सिंचाई प्रभावित न हो।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार और बिजली वितरण कंपनियां शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल, अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा मध्य प्रदेश में किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है।

