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मूंग खरीदी और ई-टोकन की मांग पर किसानों का भोपाल कूच, 15 बैरिकेड तोड़ते हुए राजधानी पहुंचे; पुलिस की तैयारी पड़ी फीकी

मूंग खरीदी और ई-टोकन की मांग पर किसानों का भोपाल कूच, 15 बैरिकेड तोड़ते हुए राजधानी पहुंचे; पुलिस की तैयारी पड़ी फीकी

मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर मंगलवार को किसानों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। नर्मदापुरम से राजधानी भोपाल की ओर निकले हजारों किसानों ने रास्ते में लगाए गए पुलिस के बैरिकेड एक-एक कर पार कर लिए। कई स्थानों पर बैरिकेड हटाए गए, जबकि कुछ जगह उन्हें तोड़कर किसान आगे बढ़ गए। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और पुलिस की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

15 जगह बैरिकेडिंग, फिर भी नहीं रुका काफिला

किसानों के भोपाल कूच को रोकने के लिए पुलिस ने नर्मदापुरम से भोपाल तक करीब 15 स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी। संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया था। इसके बावजूद हजारों किसानों का जत्था लगातार आगे बढ़ता रहा और अधिकांश बैरिकेड पार कर राजधानी की ओर बढ़ गया।

मूंग खरीदी और ई-टोकन बना मुख्य मुद्दा

प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग की सरकारी खरीद, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार तथा कृषि उपज से जुड़े अन्य मुद्दों का समाधान शामिल है। किसानों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

जगह-जगह पुलिस और किसानों के बीच तनाव

कूच के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शन के दौरान किसान लगातार आगे बढ़ते रहे। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

राजधानी में बढ़ी सुरक्षा

किसानों के भोपाल पहुंचने की संभावना को देखते हुए राजधानी में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

सरकार से समाधान की मांग

किसानों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और कई बार ज्ञापन देने के बावजूद ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि यदि जल्द ही मूंग खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

प्रशासन की नजर हालात पर

प्रशासन ने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। वहीं, सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि किसानों की मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है और आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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