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तोतों के पेड़ों के लिए मेट्रो स्टेशन बदलने की कवायद: 3 विकल्प बताए, हर जगह अलग चुनौती; लागत 400 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान

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शहर में मेट्रो स्टेशन के निर्माण को लेकर अब तोतों के पेड़ों का मुद्दा सामने आया है। तोतों के बसेरे वाले पेड़ों को बचाने के लिए प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन की जगह बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए तीन संभावित विकल्प सामने रखे गए हैं। हालांकि, तीनों स्थानों पर अलग-अलग तरह की चुनौतियां हैं। स्थान बदलने की स्थिति में मेट्रो परियोजना की लागत 400 करोड़ रुपए तक बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।

मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए तय स्थान के आसपास बड़ी संख्या में पेड़ हैं, जिनमें तोतों का बसेरा बताया जा रहा है। पेड़ों को काटने के बजाय वैकल्पिक स्थान तलाशने पर विचार किया जा रहा है।

तीन विकल्पों पर विचार

मेट्रो से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की ओर से स्टेशन की जगह बदलने के लिए तीन विकल्प सुझाए गए हैं। प्रत्येक विकल्प में जमीन, यातायात, निर्माण और मौजूदा मेट्रो लाइन के साथ कनेक्टिविटी से जुड़ी अलग चुनौती बताई जा रही है।

पहले विकल्प में स्टेशन को निर्धारित स्थान से दूसरी तरफ शिफ्ट करने की संभावना देखी जा रही है। दूसरे विकल्प में स्टेशन के डिजाइन और संरचना में बदलाव पर विचार किया जा सकता है। वहीं तीसरे विकल्प में स्टेशन के लिए पूरी तरह अलग स्थान तलाशने की संभावना है।

हालांकि, इनमें से कौन सा विकल्प अंतिम रूप से चुना जाएगा, यह तकनीकी और व्यवहारिक जांच के बाद तय होगा।

लागत 400 करोड़ तक बढ़ने का अनुमान

स्टेशन की जगह बदलने का सीधा असर परियोजना की लागत पर पड़ सकता है। अनुमान है कि नए स्थान पर निर्माण, डिजाइन में बदलाव और अन्य जरूरी कार्यों के कारण लागत करीब 400 करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है।

अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि पर्यावरण और पक्षियों के बसेरे को सुरक्षित रखते हुए मेट्रो परियोजना का निर्माण भी निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए। इसके लिए सभी विकल्पों की व्यवहार्यता पर विचार किया जा रहा है।

तोतों के बसेरे वाले पेड़ों को बचाने की कोशिश

मेट्रो स्टेशन के आसपास मौजूद पेड़ों पर लंबे समय से तोतों का बसेरा बताया जा रहा है। पेड़ों की कटाई से पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से निर्माण एजेंसियों के सामने पेड़ों को बचाने और स्टेशन का निर्माण करने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

विशेषज्ञों की राय और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की योजना तैयार की जाएगी। फिलहाल तीनों विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि स्टेशन की जगह बदलेगी या मौजूदा डिजाइन में संशोधन करके निर्माण आगे बढ़ाया जाएगा।

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