भोपाल में बुजुर्ग दंपती को 3 महीने तक किया डिजिटल अरेस्ट, वीडियो में जाने दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर डराया; जेवर गिरवी रखवाकर 22 लाख ठगे
भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा। आरोपियों ने खुद को कभी दिल्ली पुलिस का अधिकारी, कभी चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और कभी सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर दंपती को डराया। ठगों ने उन्हें करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी। डर के कारण दंपती ने अपने जेवर तक गिरवी रख दिए और आरोपियों को करीब 22 लाख रुपए दे दिए। लगातार कई महीनों तक वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखे जाने के बाद जब बुजुर्ग दंपती को पूरे मामले पर संदेह हुआ तो उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब आरोपियों की पहचान और उनके बैंक खातों व मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है।
19 मई को आया था पहला फोन
जानकारी के मुताबिक 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल फोन पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया। उसने सुवर्णा से कहा कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। इसके बाद ठगों ने धीरे-धीरे दंपती को अपनी बातों में फंसाना शुरू कर दिया।आरोपियों ने दावा किया कि दंपती का नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। उन्होंने डराया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगों ने खुद को अलग-अलग जांच एजेंसियों और न्यायपालिका से जुड़ा अधिकारी बताकर दंपती का विश्वास जीतने की कोशिश की।
7 WhatsApp नंबरों से रखते थे निगरानी
साइबर ठगों ने इस पूरी ठगी को अंजाम देने के लिए सात अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। वे लगातार वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपती पर नजर रखते थे। उन्हें इस तरह डराकर रखा गया कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से इस मामले में चर्चा न कर सकें।दंपती को कथित जांच के नाम पर लगातार निर्देश दिए जाते थे। आरोपियों ने उन्हें यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनके बैंक खातों और संपत्ति की जांच हो रही है और उन्हें पैसे देकर खुद को मामले से बाहर साबित करना होगा।
जेवर गिरवी रखकर दिए 22 लाख रुपए
ठगों की धमकियों और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग दंपती मानसिक दबाव में आ गए। आरोपियों की मांग पूरी करने के लिए उन्होंने अपने जेवर गिरवी रख दिए। इसके बाद करीब 22 लाख रुपए ठगों को दे दिए गए।कई दिनों तक ठगों के संपर्क में रहने के बाद दंपती को महसूस हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी साइबर सेल को दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामलों में ठग अक्सर खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी का अफसर, वकील या जज बताकर लोगों को डराते हैं। वीडियो कॉल पर पूछताछ और गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।पुलिस का कहना है कि किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस तरह वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को घर में कैद रहने या पैसे जमा करने का निर्देश नहीं दिया जाता। यदि कोई व्यक्ति पुलिस या कोर्ट का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की धमकी दे और पैसे की मांग करे तो तुरंत कॉल काटकर संबंधित पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।भोपाल के इस मामले में पुलिस अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सातों WhatsApp नंबरों, पैसों के लेनदेन और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। जांच के बाद इस संगठित साइबर ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों का भी पता चलने की उम्मीद है।

