बीयू में शिक्षा संवाद बना समस्याओं का मंच: शिक्षकों-विद्यार्थियों ने उठाए लंबे समय से लंबित मुद्दे, मंत्री के सामने गूंजा असंतोष
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में शुक्रवार को आयोजित शिक्षा संवाद कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया, जब यह आयोजन केवल सुझावों तक सीमित न रहकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और नाराजगी का मंच बन गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने खुलकर अपनी-अपनी समस्याएं सामने रखीं।
कार्यक्रम में कई प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय में वर्षों से लंबित मुद्दों को उठाते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल भी खड़े किए। शिक्षा संवाद का उद्देश्य जहां संवाद और समाधान बताया गया था, वहीं यह मंच समस्याओं की लंबी फेहरिस्त सामने आने का केंद्र बन गया।
वर्षों पुरानी समस्याएं फिर उठीं
शिक्षकों और कर्मचारियों ने वेतन विसंगतियों, पदोन्नति में देरी, खाली पदों की समस्या और प्रशासनिक अड़चनों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वहीं शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने शोध सुविधाओं की कमी, लैब संसाधनों की स्थिति और शैक्षणिक माहौल से जुड़ी परेशानियों को लेकर असंतोष जताया।
कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि समस्याएं पहले भी कई मंचों पर उठाई जा चुकी हैं, लेकिन उनका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है।
शिक्षा संवाद में खुलकर सामने आई नाराजगी
उच्च शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में प्रतिभागियों ने बिना हिचकिचाहट अपनी बात रखी, जिससे कार्यक्रम का माहौल गंभीर हो गया। कुछ शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय में निर्णय प्रक्रिया धीमी है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
विद्यार्थियों ने भी शैक्षणिक कैलेंडर, परीक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर अपनी शिकायतें रखीं।
मंत्री ने सुनीं बातें, समाधान का दिया आश्वासन
कार्यक्रम में मौजूद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सुझाव और शिकायतें दोनों जरूरी हैं और सरकार इन पर विचार करेगी।
मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उठाए गए मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
संवाद से समाधान की उम्मीद
हालांकि कार्यक्रम के दौरान समस्याएं ज्यादा प्रमुख रहीं, लेकिन प्रशासन का कहना है कि इस तरह के संवाद मंच भविष्य में सुधार की दिशा तय करने में मदद करेंगे।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि उठाए गए मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार कब तक दिखाई देता है।

