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बारिश के लिए श्मशान घाट में गधों से कराई नमक-उड़द की बुवाई, फूलों की माला पहनाकर काल भैरव से की पूजा

बारिश के लिए श्मशान घाट में गधों से कराई नमक-उड़द की बुवाई, फूलों की माला पहनाकर काल भैरव से की पूजा

जिले में बारिश की लंबी खेंच से परेशान लोगों ने बुधवार रात इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए एक अनोखी और पुरानी परंपरा निभाई। मंदसौर के चंद्रपुरा इलाके में लोगों ने श्मशान घाट पहुंचकर गधों से नमक और उड़द की बुवाई कराई। मान्यता है कि इस तरह की परंपरा निभाने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में बारिश का दौर शुरू हो सकता है।परंपरा के तहत सबसे पहले गधों को फूलों की मालाएं पहनाई गईं। इसके बाद उन्हें श्मशान घाट ले जाया गया, जहां लोगों ने गधों से नमक और उड़द की बुवाई कराई। इस दौरान स्थानीय लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना भी की।

काल भैरव के दरबार में भी की गई पूजा

गधों को सजाने के बाद उन्हें काल भैरव मंदिर ले जाया गया। यहां पूजा-अर्चना कर बारिश के लिए प्रार्थना की गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परंपरा का संबंध क्षेत्र में अच्छी बारिश की कामना से है। ग्रामीण और स्थानीय लोग लंबे समय से चली आ रही इस मान्यता के तहत अलग-अलग धार्मिक उपाय करते रहे हैं।

बारिश की खेंच से बढ़ी चिंता

मंदसौर में बारिश का दौर कमजोर पड़ने के कारण किसान और आम लोग चिंतित हैं। खरीफ फसलों के लिए इस समय पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है। बारिश में लंबा अंतराल होने से खेतों में खड़ी फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।ऐसे में चंद्रपुरा इलाके के लोगों ने बारिश के लिए यह पारंपक तरीका अपनाया। श्मशान घाट में गधों से नमक और उड़द की बुवाई कराने की यह परंपरा इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस अनुष्ठान के बाद इंद्रदेव प्रसन्न होंगे और जल्द ही क्षेत्र में अच्छी बारिश होगी। हालांकि, इस परंपरा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इसे स्थानीय लोक-मान्यता के तौर पर ही देखा जाता है।फिलहाल मंदसौर के लोगों को आसमान में बादलों के लौटने और अच्छी बारिश का इंतजार है। किसानों की नजर मौसम के अगले दौर पर टिकी हुई है।

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