दिग्विजय सिंह का RSS-VHP पर बड़ा हमला, बोले- धर्म से कोई लेना-देना नहीं; सनातन यात्रा में दिया बयान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि RSS और VHP का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। दिग्विजय सिंह का यह बयान सनातन यात्रा के दौरान सामने आया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर धार्मिक संगठनों और उनकी विचारधारा को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में RSS और VHP की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन संगठनों को धर्म के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सनातन धर्म और धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए इन संगठनों की गतिविधियों पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता का कहना है कि धर्म का संबंध आस्था, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों से है, जबकि राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की गतिविधियों को धर्म से अलग करके देखना चाहिए।
सनातन यात्रा के दौरान दिया बयान
दिग्विजय सिंह सनातन यात्रा के दौरान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने RSS और VHP को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और देश में धर्म से जुड़े मुद्दों पर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस बयान पर संबंधित संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
RSS और VHP को लेकर पहले भी उठाते रहे हैं सवाल
दिग्विजय सिंह इससे पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों की विचारधारा तथा गतिविधियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वह कई मौकों पर भाजपा और RSS की राजनीति की आलोचना कर चुके हैं। कांग्रेस नेता का मानना रहा है कि धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनके बयानों में अक्सर धार्मिक सद्भाव, सामाजिक एकता और संविधान के मूल्यों पर जोर देखने को मिलता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
दिग्विजय सिंह के इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं। खासकर ऐसे समय में जब देश में धार्मिक पहचान, सनातन परंपराओं और राजनीतिक संगठनों की भूमिका को लेकर लगातार बहस हो रही है। कांग्रेस और भाजपा के बीच धार्मिक मुद्दों पर पहले भी कई बार तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।
दिग्विजय सिंह के बयान से एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया है कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक संगठनों की विचारधारा के बीच किस तरह अंतर किया जाना चाहिए। फिलहाल, उनके बयान पर राजनीतिक दलों और संबंधित संगठनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

