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कन्हैया माधवपुर वार्ड-31 में बदहाल व्यवस्था: तीन साल से घरों के सामने जमा है गंदा पानी, सड़कों पर बने गड्ढे बने परेशानी

कन्हैया माधवपुर वार्ड-31 में बदहाल व्यवस्था: तीन साल से घरों के सामने जमा है गंदा पानी, सड़कों पर बने गड्ढे बने परेशानी

कन्हैया माधवपुर वार्ड-31 में जलभराव और खराब सड़कों की समस्या स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। यहां सीवर ओवरफ्लो और मुख्य सड़क पर सालभर जमा रहने वाला गंदा पानी लोगों की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले तीन सालों से उनके घरों के सामने 12 महीने गंदा पानी जमा रहता है।

लोगों का कहना है कि लंबे समय से शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सीवर का पानी सड़क पर फैलने से लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, गंदगी और दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी डर बना रहता है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। नालियों और सीवर की सफाई नहीं होने के कारण पानी सड़कों पर भर जाता है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वार्ड की सड़कों की हालत भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई बार गड्ढों के कारण हादसे होने का खतरा भी बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सीवर लाइन की मरम्मत, जल निकासी की व्यवस्था और सड़कों का सुधार कराया जाए।

निवासियों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों के दावों के बावजूद वार्ड की जमीनी स्थिति काफी खराब है।

वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और वार्ड में साफ-सफाई, सड़क और जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी।

कन्हैया माधवपुर वार्ड-31 की यह स्थिति नगर निकाय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या को दूर करने के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाता है।

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